भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम के चलते जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में तेज बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने सागर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और सतना समेत कई अन्य जिलों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

लगातार बारिश का असर खरगोन जिले के गोगांवा क्षेत्र में भी दिखाई दिया। यहां 18.38 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता वाला साटक जलाशय पूरी तरह भरने के बाद ओवरफ्लो हो गया। पानी स्पिल वे के ऊपर से बह रहा है। करीब दो साल बाद जलाशय में ऐसी स्थिति बनी है। जलाशय के निचले हिस्से में स्थित साटकेश्वर महादेव मंदिर भी पानी में डूब गया है। मंदिर के गर्भगृह में पानी भरने के बाद अब वहां घंटी और त्रिशूल ही दिखाई दे रहे हैं। जबकि, श्रद्धालु नंदी के पास पहुंचकर फूल चढ़ाते नजर आए।

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खास बात यह है कि 29 जुलाई तक साटक जलाशय करीब 72 प्रतिशत खाली था। इसके बाद महज तीन दिनों में हुई तेज बारिश ने इसे पूरी तरह भर दिया। इससे पहले जलाशय सितंबर 2023 में 16 तारीख और सितंबर 2024 में 2 तारीख को ओवरफ्लो हुआ था।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त को कम दबाव का क्षेत्र बना था। अगले दिन 13 अगस्त की सुबह यह सिस्टम डिप्रेशन में बदल गया। फिलहाल इसके पश्चिम बंगाल और झारखंड की दिशा में आगे बढ़ने की स्थिति है। इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश में आने वाले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। खासकर पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

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मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान अब तक 524.8 मिलीमीटर यानी करीब 20.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। इसके बावजूद प्रदेश अभी सामान्य औसत से करीब 2.8 इंच पीछे है। अब तक हुई कुल बारिश सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम है। क्षेत्रवार आंकड़ों की बात करें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम है। जबकि, पश्चिमी हिस्से में यह कमी लगभग 5 प्रतिशत है। हालांकि, कुछ जिलों में तस्वीर इसके उलट है। भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

मानसून की शुरुआत में प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा थी। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई में लगातार अच्छी बारिश मिलने से स्थिति में सुधार आया और महीने का बारिश कोटा पूरा हो गया। हालांकि, मानसून ब्रेक के कारण बीच में कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रही थी। अब एक बार फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम बनने से बारिश का सिलसिला तेज हुआ है लेकिन जून में हुई कमी अभी पूरी नहीं हो पाई है।

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मध्य प्रदेश में पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 37.3 इंच माना जाता है। राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य सीजनल बारिश करीब 38 से 39 इंच के आसपास रहती है। राजधानी भोपाल में अगस्त के महीने में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड साल 2006 के नाम है। उस साल अगस्त में करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी। इसी साल 14 अगस्त को महज 24 घंटे के भीतर करीब 12 इंच बारिश हुई थी जो शहर में एक दिन में हुई सबसे बड़ी बारिश की घटनाओं में शामिल है।