नई दिल्ली। आतंकी साजिश के आरोपों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक को दिल्ली की अदालत से डिफॉल्ट जमानत मिलने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी नागरिक के मामले में नरमी बरती। जबकि, भारतीय नागरिकों के खिलाफ UAPA का इस्तेमाल अलग तरीके से किया जाता है। हालांकि, अदालत ने वैन डाइक को जमानत जांच पूरी होने की निर्धारित कानूनी अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने से जुड़े आधार पर दी है।
राउज एवेन्यू स्थित विशेष NIA अदालत के न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 18 सितंबर को वैन डाइक को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर डिफॉल्ट बेल दी थी। अदालत ने उसे जांच में सहयोग करने और बिना अनुमति दिल्ली से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया था। बाद में अदालत ने उसे अमेरिका जाने की अनुमति देने से जुड़ी शर्तों में भी बदलाव किया।
NIA ने वैन डाइक को 13 मार्च 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में छह यूक्रेनी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि सातों विदेशी नागरिकों के म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों से संबंध थे और वैन डाइक ने ड्रोन युद्ध से जुड़ा प्रशिक्षण दिया था।
मामला शुरू में UAPA की धारा 18 के तहत दर्ज किया गया था। हालांकि, सितंबर में NIA की ओर से दाखिल आरोपपत्र में सातों आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धाराएं 21 और 23 लगाई गई। NIA ने अदालत को बताया था कि कथित UAPA अपराधों को लेकर जांच अभी जारी है। अदालत ने माना कि केवल इमिग्रेशन कानून से जुड़े आरोपों का आरोपपत्र दाखिल करने से UAPA से संबंधित जारी जांच के आधार पर डिफॉल्ट बेल के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर वैन डाइक को राहत मिली।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वैन डाइक को रिहा कर अमेरिका लौटने की अनुमति देना सरकार की नीति पर सवाल खड़े करता है। रमेश ने दावा किया कि NIA ने मार्च में वैन डाइक और छह अन्य विदेशी नागरिकों को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश के मामले में गिरफ्तार किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसी ने अदालत में आरोपियों के भारत विरोधी विद्रोही समूहों से संबंध और वैन डाइक की कथित गतिविधियों का उल्लेख किया था। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि अगर वैन डाइक के खिलाफ इतने गंभीर आरोप थे तो उसे भारत में प्रवेश और म्यांमार जाने की अनुमति कैसे मिली। उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि इन विदेशी नागरिकों को भारत का वीजा किस आधार पर मिला।
रमेश ने दावा किया कि 23 से 26 मई के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने यह मामला विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने उठाया था। इसके बाद उन्होंने वैन डाइक के खिलाफ UAPA से जुड़े आरोपों में हुए बदलाव को लेकर सवाल खड़े किए। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव ने इस मामले के घटनाक्रम को प्रभावित किया और केंद्र से पूछा कि इसके बदले भारत को क्या मिला।