नर्सिंग परीक्षा में देरी पर फूटा छात्रों का गुस्सा, MPNRC के खिलाफ किया प्रदर्शन

भोपाल में नर्सिंग परीक्षा और रिजल्ट में देरी से नाराज छात्रों ने MPNRC के खिलाफ प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर प्रदर्शन किया।

Updated: Aug 13, 2026, 09:04 PM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग परीक्षाओं और रिजल्ट में लगातार हो रही देरी के विरोध में छात्रों ने बुधवार को मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) के खिलाफ प्रदर्शन किया। नाराज छात्रों ने काउंसिल की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली और उसका क्रियाकर्म किया। प्रदर्शन के दौरान परीक्षा नियंत्रक एवं हाई कोर्ट मामलों के ओआईसी धीरज गोविंदानी और लीगल एडवाइजर हरीश बारी के प्रतीकात्मक पुतले भी जलाए गए।

नर्सिंग छात्र संगठन के सदस्य संदीप परमार ने कहा कि सत्र 2021-22 में मान्यता प्राप्त संस्थानों में दाखिला लेने और परीक्षा फॉर्म भरने वाले विद्यार्थियों को जीएनएम अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही सत्र 2022-23 के बीएससी नर्सिंग विद्यार्थियों का प्रथम वर्ष का परिणाम घोषित कर उन्हें द्वितीय वर्ष की परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की गई है।

छात्र संगठन का आरोप है कि सत्र 2022-23 से संबंधित मामले में हाई कोर्ट का आदेश आए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन इसके बावजूद विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित नहीं की गई। छात्रों ने लंबित परीक्षाओं को जल्द कराने के साथ ही देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के दौरान नर्सिंग संस्थानों के निरीक्षण और उन्हें मान्यता देने की प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग रखी। संगठन के मुताबिक, यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

छात्र नेता संदीप परमार ने काउंसिल के लीगल एडवाइजर हरीश बारी की नियुक्ति और उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बारी नोटरी अधिवक्ता होने के बावजूद काउंसिल में लीगल एडवाइजर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

परमार ने यह भी आरोप लगाया कि बारी एक ही समय में दो स्थानों पर कार्यरत हैं और काउंसिल में उपस्थिति दर्ज किए बिना वेतन प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विधानसभा में सवाल भी लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने काउंसिल से जुड़े कानूनी मामलों में हुए खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की भी मांग की। संदीप परमार का आरोप है कि काउंसिल के विभिन्न मामलों को अदालत तक ले जाने के कारण कानूनी खर्च बढ़ा और विद्यार्थियों से ली गई फीस से वकीलों को बड़ी रकम का भुगतान किया गया।

छात्र संगठन ने करीब 10 करोड़ रुपये के ऐसे भुगतान की जांच कराने और उसका पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि यह राशि नामांकन और परीक्षा फीस के जरिए विद्यार्थियों से जुड़ी है। इसलिए इसके इस्तेमाल की जानकारी सामने आनी चाहिए। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित परीक्षाओं और रिजल्ट को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।