साइबर ठगों ने मोबाइल यूजर्स को निशाना बनाने का तरीका बदल दिया है। अब वे केवल ओटीपी या पासवर्ड हासिल करने तक सीमित नहीं हैं बल्कि फर्जी लिंक और एप के जरिए मोबाइल का रिमोट एक्सेस लेकर निजी फोटो, संवेदनशील जानकारी और बैंकिंग से जुड़ा डेटा तक पहुंच बना रहे हैं। बढ़ते मोबाइल हैकिंग स्कैम को देखते हुए सीबीआई ने एडवाइजरी जारी की है। राज्य साइबर पुलिस के पास भी इस तरह की सैकड़ों शिकायतें अलग-अलग थानों से पहुंच चुकी हैं।

ठग आमतौर पर लोगों को लॉटरी, फ्री गिफ्ट, लकी ड्रॉ, फ्री रिचार्ज, पैन अपडेट या बिल भुगतान जैसे लालच देकर लिंक भेजते हैं। कई मामलों में बैंक अधिकारी बनकर खाते को ब्लॉक किए जाने का डर दिखाया जाता है। इसके बाद एपीके फाइल या किसी फर्जी एप को डाउनलोड कराने की कोशिश होती है। एप इंस्टॉल होने के बाद ठग फोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें:दलीप ट्रॉफी में फिफ्टी लगाने वाले यंगेस्ट बैटर बने वैभव सूर्यवंशी, सेंट्रल जोन के खिलाफ बनाए 92 रन

मोबाइल में सेंध लगने के कुछ संकेत भी नजर आ सकते हैं। फोन की बैटरी या मोबाइल डेटा अचानक तेजी से खत्म होना, बिना वजह डिवाइस गर्म होना, मोबाइल का सामान्य से ज्यादा धीमा चलना या कोई अनजान एप दिखाई देना इनमें शामिल हैं। इसके अलावा अगर आपके नंबर से आपकी जानकारी के बिना संदिग्ध लिंक या स्पैम मैसेज भेजे जा रहे हैं तो इसे भी संभावित हैकिंग का संकेत माना जाना चाहिए।

साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक न किया जाए और अज्ञात स्रोत से मिले एप को डाउनलोड न किया जाए। मोबाइल एप केवल आधिकारिक स्टोर से ही इंस्टॉल करने चाहिए। पिन, पासवर्ड और ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। सार्वजनिक वाईफाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते समय बैंकिंग या यूपीआई लेनदेन से बचना चाहिए। साथ ही किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट कंट्रोल एप को अनुमति नहीं देनी चाहिए।

यह भी पढ़ें:भोपाल के नूर उस सबाह पैलेस से जुड़े रिलायबल ग्रुप से 1 करोड़ की साइबर ठगी, पुलिस ने 95 लाख रुपये किए होल्ड

अगर मोबाइल हैक होने या साइबर ठगी का शक हो तो शुरुआत के कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले मोबाइल डेटा और वाईफाई बंद कर फोन को एयरप्लेन मोड पर करना चाहिए। इसके बाद बैंक से संपर्क कर कार्ड, नेट बैंकिंग और यूपीआई सेवाओं को ब्लॉक करवाना जरूरी है। आर्थिक ठगी होने पर शुरुआती एक से दो घंटे के भीतर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देने के साथ www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय रहते की गई कार्रवाई से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ जाती है।