सीहोर। केंद्रीय कृषि मंत्री व मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। सीहोर में आदिवासियों के घर तोड़े जाने के खिलाफ शिवराज चौहान रविवार को धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने कहा था कि मेरे क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतहा हो गई। अब उनके बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी मैदान में आ गए हैं। शिवराज के दिल्ली प्रवास के बीच कार्तिकेय सिंह चौहान भी पीड़ित आदिवासियों के पास पहुँचे और उनके साथ धरने पर बैठ गए।
दरअसल, कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब एक साल पहले शिवराज ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बात कर आदिवासियों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। इस बावजूद आदिवासियों का घर तोड़ दिया गया। वन विभाग का दावा है कि जिन घरों को तोड़ा गया है, वह वन भूमि पर थी। उनलोगों ने इस पर कब्जा किया था। इसके बाद यहां घर बनाया था।
इसपर शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय ने कहा कि इसमें मानवीय पहलुओं को देखना होगा। परिवार के लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं। अधिकारियों ने इनके साथ अत्याचार किया है। कार्तिकेय ने रात में कोसमी पहुंचकर आदिवासियों के साथ खाना खाया है। साथ ही खुले आसमान के नीचे वहां एक बच्चे का बर्थडे मनाया है। उनके साथ बुधनी के स्थानीय विधायक रामाकांत भार्गव भी मौजूद रहे।
इस दौरान कार्तिकेय ने मीडिया से कहा कि हम सरकार के खिलाफ मोर्चा नहीं खोल रहे हैं। ये हमारे वोटर्स हैं। इन आदिवासियों की वजह से मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी है। इनके साथ न्याय होना चाहिए। कार्तिकेय ने कहा कि हम यहां सरकार से लड़ने नहीं आए हैं। कई चुनावों को देख लीजिए, यहां दूसरी पार्टियों को सिंगल डिजिट में वोट नहीं मिले हैं। उन आदिवासियों पर कार्रवाई हुई है जो वर्षों से यहां रह रहे हैं। आप कागज ऐसे लोगों से मांग रहे हैं जो वर्षों से यहां रह रहे हैं।
कार्तिकेय ने कहा कि यहां अमानवीय कार्रवाई हुई है। तीन साल के बच्चे के सिर पर डीसीपी लगा दिया। नौजवान युवक को उठाकर सीधे कुएं में फेंक दिया। बहन के बाल पकड़कर उसे जान से मारने की धमकी दी। आदिवासियों के साथ बदसलूकी की है। इसमें बड़ी साजिश है। हमें इसे सफल नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे कहा कि हमने मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है। हम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास भी जा रहे हैं। राज्य सरकार को भी पत्र लिखकर केंद्रीय कृषि मंत्री ने असहमति जताई है।
बता दें कि इससे पहले शिवराज सिंह चौहान स्वयं धरनास्थल पर गए थे और पीड़ित आदिवासियों के साथ धरने पर बैठ गए थे। शिवराज ने कहा था कि मेरे क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतहा हुई है। लोगों के वर्षों पुराने घर गिरा दिए गए, फसलें कुचल दी गईं और कुएं तक पूर दिए गए। लोगों की मेहनत को कुचल दिया गया। उन्होंने कहा कि जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें सुनाई दे रही हैं। महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही हैं।