बेंगलुरु। बेंगलुरु में करीब 30 साल बाद स्थानीय निकाय चुनाव एक बार फिर पेपर बैलेट से होने जा रहे हैं। कर्नाटक राज्य चुनाव आयुक्त जीएस संग्रेषी ने घोषणा की है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत आने वाले पांच नगर निगमों के चुनाव 25 मई के बाद और 30 जून से पहले कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर का उपयोग होगा।

यह कदम मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली राज्य कैबिनेट द्वारा बेंगलुरु नगर निगम चुनाव में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर इस्तेमाल करने की सिफारिश के महीनों बाद उठाया गया है। यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पार्टी वोटिंग मशीनों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए बैलेट पेपर के इस्तेमाल की वकालत कर रही है।

बेंगलुरु में ईवीएम का पहली बार इस्तेमाल 1996 में हुआ था। इसके बाद से ईवीएम लगातार चुनावों का हिस्सा बने रहे, लेकिन लगभग तीन दशक बाद शहर फिर पारंपरिक कागज़ी मतपत्र प्रणाली की ओर लौट रहा है। राज्य चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल GBA ही नहीं, बल्कि आगामी जिला और तालुक पंचायत चुनाव भी बैलेट पेपर से कराने का निर्णय लिया गया है।

चुनाव आयुक्त जीएस संग्रेषी ने बताया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके पास यह अधिकार है कि वह चुनाव किस प्रणाली से कराए। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर प्रणाली को “बेस्ट प्रैक्टिस” माना जाता है और यह अभी भी दुनिया के विकसित देशों जैसे अमेरिका में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी एक्ट में स्पष्ट प्रावधान है कि चुनाव EVM या बैलेट पेपर किसी भी विकल्प से कराए जा सकते हैं। इसलिए आयोग ने सभी पक्षों और परिस्थितियों को देखते हुए पेपर बैलेट को चुना।

संग्रेषी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी तरह की धांधली की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। सभी मतदान केंद्रों पर CCTV निगरानी, मजबूत पुलिस सुरक्षा और साफ‑सुथरे मतदान केंद्र सुनिश्चित किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी समय पर फ्री और फेयर चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बेंगलुरु नगर निगम में चुनी हुई परिषद की अवधि 11 सितंबर 2020 को समाप्त हो गई थी और तब से शहर प्रशासकों द्वारा चलाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि चुनाव 30 जून तक हर हाल में पूरे किए जाएं।