नई दिल्ली। नीट यूजी पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा में धांधली और पेपर लीक पर शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सरकार सोमवार को इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों के तहत पेपर लीक के संगठित मामलों में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी शामिल किए जाने की तैयारी है।

कैबिनेट की मंजूरी ऐसे समय में आई है जब NEET-UG पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में सुधार, गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी 26 दिन तक अनशन कर चुके हैं। जबकि, संसद के भीतर भी विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है।

यह भी पढ़ें:CG: सूरजपुर में कोल परियोजना पर बवाल, ग्रामीणों ने पुलिस को पीटा, DSP समेत 15 जवान घायल

कैबिनेट के फैसले से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम करीब 2 मिनट 56 सेकंड का वीडियो संदेश जारी किया था। वीडियो में उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं है बल्कि यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की है और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो। इसलिए कम समय में करीब 22 लाख छात्रों की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई और 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिए गए।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून को और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के निर्देश देने की जानकारी भी दी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और तीन महीने के भीतर फैसला तथा सजा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें:बच्चों के जख्मों पर मरहम लगाइए, नमक नहीं, जंतर-मंतर लाठीचार्ज की रजा मुराद ने की निंदा

फिलहाल देश में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम 2024 लागू है। इस कानून को 12 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी और 21 जून 2024 से यह पूरे देश में प्रभावी है। मौजूदा कानून के अनुसार, पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराध या गिरोह की भूमिका साबित होने पर 5 से 10 साल तक की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। 

यदि कोई परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या सेवा प्रदाता दोषी पाया जाता है तो उस पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, परीक्षा की पूरी लागत की वसूली और चार सालों तक परीक्षा आयोजित करने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस कानून के तहत अपराध गैर जमानती हैं और इनकी जांच केवल डीएसपी या उससे वरिष्ठ अधिकारी ही कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें:MP: सरकारी गोदाम से 35 लाख के किताब गायब, जांच टीम के पहुंचने से पहले लगी आग

सूत्रों के अनुसार, सरकार अब इन प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक से जुड़े संगठित अपराधों पर आर्थिक दंड बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किया जाएगा। जबकि, दोषियों को 10 साल तक की सजा देने का प्रावधान जोड़ा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इस संशोधन विधेयक को 27 जुलाई को लोकसभा में पेश करने की तैयारी में है। इसके बाद इसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश की जाएगी।