सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाज गॉट लेटेंट विवाद से जुड़े मामले में कॉमेडियन समय रैना को अदालत के निर्देशों का पालन न करने और कोर्ट को गुमराह करने पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने समय रैना के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने पहले दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि दो सप्ताह के भीतर जमा कराई जाए नहीं तो उनके खिलाफ आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की याचिका से जुड़ा है। उनपर आरोप लगाया गया है कि इंडियाज गॉट लेटेंट शो के दौरान स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के महंगे खर्च और उससे पीड़ित लोगों को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियां की गई। याचिका में समय रैना के अलावा शो से जुड़े अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स विपुन गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर के कुछ जोक्स पर भी आपत्ति जताई गई है। इस मामले की सुनवाई रणवीर अल्लाहबादिया और आशीष चंचलानी से जुड़ी याचिकाओं के साथ की जा रही है।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि समय रैना ने अदालत को गलत जानकारी दी और पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि यह बताना कि अनुपालन संबंधी हलफनामा दाखिल कर दिया गया है। जबकि, ऐसा नहीं हुआ जो कि अदालत को गुमराह करने जैसा है। पीठ ने यह भी टिप्पणी की थी कि यह सोचकर चिंता होती है कि समय रैना किस तरह के यूथ आइकन हैं।
सुनवाई के दौरान क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने पहले भरोसा दिया था कि वे एसएमए फाउंडेशन और इस बीमारी से पीड़ित लोगों से संपर्क करेंगे लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि समय रैना लगातार अपने शो कर रहे हैं लेकिन कोर्ट के निर्देशों के बावजूद उन्होंने फाउंडेशन या मरीजों से कोई संवाद नहीं किया और अब तक स्पष्ट रूप से माफी भी नहीं मांगी।
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केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी समय रैना के हालिया रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि अपने एक नए शो में समय रैना ने चल रहे कोर्ट केस पर परोक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए नींबू-मिर्च का जिक्र किया जो अदालत की कार्यवाही की ओर इशारा माना जा सकता है। मेहता ने कहा कि पहले उन्होंने इस मुद्दे को अदालत के सामने नहीं रखने का विचार किया था लेकिन जब पता चला कि कोर्ट के आदेश के बावजूद एसएमए फाउंडेशन से संपर्क नहीं किया गया तब यह बात उठाना जरूरी हो गया।
समय रैना के वकील ने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि फाउंडेशन से संपर्क न करने के पीछे किसी तरह का अहंकार नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे अपने मुवक्किल से बात कर उन्हें अदालत के सभी निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार करेंगे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि विदेश में रहकर वे भारतीय कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो जाते हैं। कोर्ट ने कहा, "अगर यह अहंकार नहीं है तो हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का मतलब ही बदलना पड़ेगा।"
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले समय रैना पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही थी। हालांकि, उनके वकील द्वारा अंतिम अवसर देने की अपील के बाद जुर्माने की राशि घटाकर 3 लाख रुपये कर दी गई। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक उसके निर्देशों का संतोषजनक पालन नहीं किया गया तो जुर्माने की राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक की जा सकती है।