नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में पिछले महीनों कफ सिरप पीने से 24 से अधिक बच्चों की मौतों के बाद केंद्र ने बड़ा कदम उठाया है। अब देश भर के दवा विक्रेता बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के कफ सिरप नहीं बेच सकेंगे। सरकार की शीर्ष नियामक औषध परामर्श समिति ने अपनी 67वीं बैठक में कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगाने के लिए यह फैसला किया है, जिसके बाद अब देश भर में आसानी से कफ सिरप उपलब्ध नहीं होगा। सरकार का लक्ष्य है कि लोग ओवर द काउंटर की जगह डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से दवा लें।
अब तक ज्यादातर कफ सिरप ओवर द काउंटर बेचे जा रहे थे, लेकिन केंद्र सरकार के नए फैसले के बाद अब इस पर लगाम लग सकेगी। सरकार की शीर्ष नियामक औषध परामर्श समिति ने 67वीं बैठक में इस फैसले को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत अब कफ सिरप को उन दवाओं की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, जिन्हें ओवर द काउंटर बेचा जा सकता है।
देश और देश के बाहर कफ सिरप पीने के बाद पिछले दिनों बच्चों की मौतों के कई मामले सामने आए थे। बच्चों की मौतों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि भी खराब हो रही थी, जिसके मद्देनजर सरकार ने यह कदम उठाया है। साथ ही सरकार की कोशिश है कि लोग दवा विक्रेताओं से सीधे दवा न खरीदें और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही दवा लें। इसके कई फायदे हैं। एक तो दवाओं के नशे के लिए इस्तेमाल पर रोक लगेगी। दूसरी ओर डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना कई बार लोग बिना किसी जरूरत के धड़ल्ले से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करते हैं। इसके कारण एंटीबायोटिक्स असर नहीं करती है और शरीर में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं पर प्रतिक्रिया करना बंद कर देते हैं।
बता दें कि कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में कम से कम 24 बच्चों की 'कोल्ड्रिफ' सिरप पीने के बाद गुर्दे की खराबी से मौत हो गई। साथ ही राजस्थान और गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे। देश के साथ ही अन्य देशों से भी ऐसे मामले सामने आने के बाद देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान झेलना पड़ा था। खासतौर पर उज्बेकिस्तान में भारतीय कफ सिरप पीने के बाद 68 बच्चों की मौत के मामले में 21 लोगों को सजा सुनाई गई थी। इसी तरह इंडोनेशिया में भी ऐसे ही कफ सिरप पीने से 2022 और 2023 के बीच 200 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। गाम्बिया में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे।