देश के दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का निधन, कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते थे 9 स्वर्ण पदक

देश के महान निशानेबाज और कोच जसपाल राणा (49) का दिल्ली के अस्पताल में निधन हो गया। म्यूनिख से लौटते समय विमान में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें भर्ती कराया गया था। वहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

Updated: Jun 12, 2026, 01:52 PM IST

भारतीय खेल जगत को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। देश के महान निशानेबाज, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और राष्ट्रीय टीम के प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल के साथ लौटने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें दक्षिण दिल्ली के साकेत स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष कालीकेश नारायण सिंह देव ने की।

जानकारी के अनुसार, 1 जून को जर्मनी से भारत लौटते समय विमान में ही जसपाल राणा को अस्वस्थता महसूस होने लगी थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें सीधे अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच के बाद उनके हृदय में स्टेंट डाला गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी था लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के दौरान ही उनकी तबीयत बिगड़ने के संकेत मिल गए थे।

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एक खिलाड़ी के रूप में शानदार उपलब्धियां हासिल करने वाले जसपाल राणा ने कोच और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनर के रूप में भी भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतकर इतिहास रचा था। इसके अलावा सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई प्रमुख निशानेबाजों के प्रदर्शन को निखारने में भी उनका बड़ा योगदान रहा था। फरवरी 2025 में उन्हें 25 मीटर पिस्टल वर्ग के लिए भारतीय जूनियर टीम का हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया था।

जसपाल राणा का खेल करियर उपलब्धियों से भरा रहा था। उन्होंने कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में मिलाकर कुल 23 पदक जीते थे। एशियाई खेलों में उनके नाम 4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक दर्ज हैं। जबकि, कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य सहित कुल 15 पदक अपने नाम किए हैं। लगातार चार कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। मात्र 18 वर्ष की उम्र में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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उनके करियर की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में 1994 की मिलान विश्व शूटिंग चैंपियनशिप शामिल है। प्रतियोगिता से ठीक पहले उनके घुटने में गंभीर फोड़ा हो गया था और डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह देते हुए उन्हें आराम करने को कहा था। इसके बावजूद उन्होंने अपने कोच सनी थॉमस के साथ प्रतियोगिता में उतरने का फैसला किया। दर्द इतना अधिक था कि वे सामान्य रूप से कपड़े तक नहीं पहन पा रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और जूनियर वर्ग में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीतकर सबको हैरान कर दिया था। उसी साल उन्होंने हिरोशिमा एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।

उत्तराखंड मूल के जसपाल राणा को निशानेबाजी की शुरुआती प्रेरणा उनके पिता नारायण सिंह राणा से मिली थी। वह इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) में कार्यरत थे। उन्होंने बचपन में ही अपने बेटे को शूटिंग की बारीकियां सिखानी शुरू कर दी थी। जसपाल ने शुरुआत में राइफल और पिस्टल दोनों में अभ्यास किया लेकिन बाद में पिस्टल शूटिंग को अपना मुख्य इवेंट चुना। कम उम्र में ही उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। 1988 में मात्र 12 वर्ष की आयु में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अपनी क्षमता का संकेत दे दिया था।

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जसपाल राणा के निधन पर पूरे खेल जगत ने गहरा शोक व्यक्त किया है। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राणा भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली पीढ़ी के महत्वपूर्ण सदस्य थे। उन्होंने उन्हें बेहद प्रतिभाशाली, समर्पित और देश के लिए जुनून के साथ खेलने वाला खिलाड़ी बताया। बिंद्रा ने कहा कि जसपाल राणा का जाना केवल उनके परिवार और शिष्यों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत और खासकर निशानेबाजी समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है।