लंदन की एक अदालत ने फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा कानूनी झटका दिया है। न्यायालय ने नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया के बकाया कर्ज की रकम चुकाने का आदेश दिया है। 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद नीरव मोदी को 10.7 मिलियन डॉलर (100 करोड़ रुपये से अधिक) का भुगतान करना होगा।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दुबई की फायरस्टार ग्रुप कंपनी को मिले लोन के लिए दी गई पर्सनल गारंटी के चलते नीरव मोदी व्यक्तिगत रूप से इस कर्ज के लिए जवाबदेह हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंगलवार को सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि मोदी गारंटी के तहत बकाया रकम चुकाने के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं।

कोर्ट ने कहा कि मोदी की देनदारी में मूल बकाया रकम के तौर पर लगभग 4.1 मिलियन डॉलर (करीब 38.9 करोड़ रुपये) और बैंक के दावे के अनुसार कैलकुलेट किया गया ब्याज शामिल है, जिससे कुल देनदारी 10.7 मिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाती है। यह विवाद बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 2012 में फायरस्टार डायमंड FZE को दी गई लोन सुविधा से जुड़ा है, जो पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले के सामने आने से कई साल पहले की बात है।

3 अगस्त 2012 को नीरव मोदी ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में एक व्यक्तिगत गारंटी दी थी। गारंटी की शर्तों के तहत, उन्होंने कर्ज लेने वाली कंपनी द्वारा डिफॉल्ट (भुगतान न कर पाने) की स्थिति में लोन चुकाने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली थी। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, 2018 की शुरुआत में कथित बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच सामने आने के बाद फायरस्टार ग्रुप की वित्तीय स्थिति काफी खराब हो गई थी।

फरवरी 2018 में, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने PNB धोखाधड़ी मामले में अपनी पहली FIR दर्ज की थी। बाद में जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस धोखाधड़ी में लगभग 2 बिलियन डॉलर के लेनदेन शामिल थे।