भोपाल। एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ टैक्सी चालक संघ के आंदोलन के चलते भोपाल में मंगलवार रात 12 बजे से ओला, उबर समेत अन्य ऑनलाइन कैब सेवाएं बंद हैं। बुधवार सुबह इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल रेलवे स्टेशन पर नजर आया। यात्रियों ने कई बार ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हुए। मजबूरी में यात्रियों को ऑटो और दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। इसी बीच कुछ यात्रियों ने ऑटो चालकों पर सामान्य किराए से डेढ़ से दो गुना अधिक रकम मांगने का भी आरोप लगाया है।
कैब सेवा ठप होने से बाहर से भोपाल पहुंचे यात्रियों को स्टेशन के बाहर सामान के साथ काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और अस्पताल जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि सामान्य दिनों में स्टेशन से ऑनलाइन कैब आसानी से मिल जाती है लेकिन हड़ताल के कारण परिवहन का विकल्प सीमित हो गया है।
स्टेशन पर मिलीं अकांक्षा ने बताया कि वह करीब आधे घंटे से कैब का इंतजार कर रही थी। उनके घुटने में परेशानी है और उनके साथ दो बेटियां हैं जिनकी उम्र दो और आठ साल है। उन्हें रोहित नगर स्थित अपोलो अस्पताल जाना था लेकिन ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद कैब नहीं मिली। इसी तरह उत्तराखंड के रहने वाले सत्यम कर्नाटक से भोपाल पहुंचे थे। उन्हें सुल्तानिया अस्पताल जाना था लेकिन काफी देर तक प्रयास करने के बाद भी कैब उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद उन्हें स्टेशन के बाहर दूसरे साधन तलाशने पड़े।
हड़ताल के दौरान भोपाल स्टेशन पर यात्रियों को छोड़ने पहुंच रही कुछ कैब को संगठन से जुड़े लोगों द्वारा रोके जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि ड्राइवरों को हड़ताल में शामिल रहने की समझाइश दी जा रही है। कुछ मामलों में यात्रियों से कैब का भुगतान नहीं करने के लिए भी कहा गया।
अवधपुरी से कैब बुक कर भोपाल स्टेशन पहुंचे परिहार ने बताया कि स्टेशन पर उनकी कैब को रोक लिया गया। वह चालक को किराया देना चाहते थे लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने भुगतान नहीं करने दिया। इसके बाद वह बिना किराया दिए ही कैब से उतर गए। उनका कहना था कि उन्होंने बाकायदा कैब बुक की थी और भुगतान करने के लिए तैयार थे।
कैब बंद होने के बाद ऑटो किराए को लेकर मिल रही शिकायतों पर आरटीओ जितेंद्र शर्मा ने कहा कि ओवरचार्जिंग की कोई भी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि कैब संगठनों के प्रतिनिधियों को बुधवार दोपहर बातचीत के लिए बुलाया गया है।
टैक्सी चालक संघ की प्रमुख मांग सरकार की ओर से कैब का उचित और स्थायी किराया निर्धारित कराने की है। संगठन का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां अपनी सुविधा के मुताबिक किराया तय करती हैं। जबकि, ड्राइवरों के ईंधन, वाहन की किस्त, बीमा, रखरखाव और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।
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संयुक्त मोर्चा पहले ही टैक्सी के लिए 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर किराया तय करने की मांग कर चुका है। इसके अलावा 1 से 2 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और बेस फेयर लागू करने की मांग भी रखी गई है। संगठन चाहता है कि सरकार किराया तय करने के बाद एग्रीगेटर कंपनियों को उसी दर के अनुसार टैक्सी संचालन के निर्देश दे।
टैक्सी संगठनों ने एग्रीगेटर कंपनियों के माध्यम से चलने वाले नॉन कमर्शियल वाहनों पर भी रोक लगाने की मांग की है। इसमें प्राइवेट नंबर वाली कारें, बाइक और ई रिक्शा शामिल हैं। संगठन का कहना है कि इन वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल से परमिट और अन्य नियमों का पालन करते हुए कमर्शियल टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों की कमाई प्रभावित हो रही है।
आंदोलन के अगले चरण में संयुक्त मोर्चे की ओर से 19 अगस्त को भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। संगठन मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों का जल्द समाधान कराने की मांग करेगा। संगठन ने दावा किया है कि बंद और धरना शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है।
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हड़ताल का असर रेलवे स्टेशन के अलावा एयरपोर्ट, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख मार्गों पर भी पड़ने की आशंका है। सुबह के समय एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को कैब की जगह ऑटो, बस या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कैब की उपलब्धता कम होने से यात्रियों को अतिरिक्त समय भी लग सकता है।
टैक्सी चालक संघ इससे पहले 23, 24 और 25 जून को एयरपोर्ट राइड का बहिष्कार कर चुका है। संगठन के मुताबिक, उस आंदोलन के बाद एग्रीगेटर कंपनियों ने किराए में कुछ सुधार किया था। इसके बावजूद आंदोलन खत्म होने के बाद व्यवस्था फिर पुराने किराए पर लौट गई। इसके बाद टैक्सी संगठनों ने परिवहन मंत्री से मुलाकात कर किराया निर्धारण सहित अपनी अन्य मांगें रखी थी।
संयुक्त मोर्चे ने अब चेतावनी दी है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों की ओर से उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो मौजूदा आंदोलन को अनिश्चितकालीन टैक्सी बंद में बदला जा सकता है। संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत और अपेक्षाकृत कम कमाई के कारण ड्राइवर आर्थिक दबाव में हैं और सरकार को इस मामले में स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
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वहीं, संगठन ने कैब बंद के कारण आम लोगों को हो रही असुविधा पर खेद जताया है। संयुक्त मोर्चे का कहना है कि ड्राइवर अपनी आजीविका से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी असामाजिक तत्व की ओर से की जाने वाली गैर कानूनी गतिविधि के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा।