नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप बढ़ा दी है। सरकारी अथॉरिटीज ने पिछले पांच महीने में गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म्स को 1.95 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजे। यानी सरकार की ओर से लगभग हर मिनट एक कॉन्टेंट ब्लॉक करने का फरमान जारी किया गया।
दरअसल, गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म्स को सरकारी अथॉरिटीज कॉन्टेंट ब्लॉक करने का फरमान भेजती हैं, और वो ब्लॉक हो जाता है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच महीनों में औसतन हर 68 सेकेंड पर 1 ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी हुआ। रोजाना 1,275 और इन पांच महीनों में करीब 1.95 लाख आदेश जारी किए गए।
यह डेटा इस साल मार्च और जुलाई के बीच का है। इसमें सरकारी अथॉरिटीज की तरफ से ऑनलाइन कॉन्टेंट को हटाने के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को भेजे गए ब्लॉकिंग ऑर्डर शामिल हैं। यही वो समय रहा, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रोटेस्ट ने अपनी बुलंदी देखी। जून की शुरुआत में जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट शुरू हुआ। 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रोटेस्ट खत्म हो गया था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान इंस्टाग्राम को लगभग 1 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर मिले। फ़ेसबुक को क़रीब 80 हजार आदेश भेजे गए। यूट्यूब को लगभग 15 हजार आदेश मिले। रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के ज़रिए पहले मिले रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच पूरे साल में 19 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को कुल 2312 ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजे गए थे। इसके मुक़ाबले 2026 के सिर्फ पांच महीनों में आदेशों की संख्या कई गुना बढ़ गई।
रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया यूज़रों की शिकायतों से यह संकेत मिले कि हटाए गए कंटेंट में छात्र आंदोलन के समर्थन वाले पोस्ट, सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की आलोचना, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ी सामग्री, डीपफेक और अन्य विवादित पोस्ट शामिल थे। हालाँकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि किन-किन पोस्ट पर कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा, 'साफ़ है कि यह सरकार सवाल पूछने, जवाबदेही तय करने और ज़िम्मेदारी निभाने से डरती है। इसलिए लोगों की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसा करना संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।' कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार का यह रवैया जनता याद रखेगी।