नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश का खुलासा करते हुए 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक अमेरिकी नागरिक और 6 यूक्रेन के नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। आरोपियों को अवैध एंट्री, वेपन और ड्रोन वॉर ट्रेनिंग, और यूरोप से ड्रोन आयात के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सभी आरोपियों को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अमेरिकी नागरिक को इमिग्रेशन ब्यूरो ने कोलकाता हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया। वहीं, लखनऊ और दिल्ली के हवाई अड्डों से तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया गया।

संदिग्धों को दिल्ली लाकर शनिवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद सोमवार को उनकी रिमांड 11 दिन बढ़ाकर 27 मार्च तक कर दी गई है। एनआईए के अनुसार, ये आरोपी हथियारबंद जातीय समूहों के इस्तेमाल के लिए यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार तक भारी मात्रा में ड्रोन के अवैध आयात में शामिल थे। कथित तौर पर ये जातीय समूह प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही गुटों को हथियार, आतंकी साजो-सामान और ट्रेनिंग देकर उनकी मदद कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि ये सभी आरोपी पहले मिजोरम पहुंचे थे और बाद में वहां से म्यांमार चले गए। मिजोरम की करीब 500 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार के चिन और रखाइन राज्य से लगती है, जो इस पूरे नेटवर्क को समझने में अहम कड़ी मानी जा रही है। नियमों के मुताबिक, मिजोरम जाने के लिए विदेशी नागरिकों को फॉरेनर्स रीजनल ऑफिस (FRO) से विशेष परमिट लेना होता है। जांच में पता चला है कि म्यांमार पहुंचने के बाद आरोपियों ने वहां के कुछ ऐसे जातीय समूहों से संपर्क किया, जो भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े बताए जाते हैं।

यूक्रेन ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर विरोध दर्ज कराया है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत में देश के राजदूत डॉ. ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज के साथ एक बैठक की। इस बैठक के दौरान उन्होंने एक आधिकारिक विरोध नोट सौंपा, जिसमें यूक्रेनी नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की गई थी।