नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को विपक्ष ने सोने और चांदी की बेकाबू कीमतों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष ने इसे आम जनता खासकर ग्रामीण भारत और महिलाओं के लिए गंभीर संकट बताया है। राजस्थान से कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि देश में सोने-चांदी की कीमतों में हालिया उछाल ने विवाह योग्य बेटियों वाले परिवार और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।
कांग्रेस सांसद ने सदन को बताया कि पिछले 13 महीनों में यानी दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच चांदी की कीमतों में करीब 306 प्रतिशत और सोने की कीमतों में लगभग 111 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत जैसे देश में जहां सोना और चांदी महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़े माने जाते हैं वहां इतनी बेलगाम महंगाई सरकार की नीतिगत और आर्थिक विफलता को उजागर करती है।
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नीरज डांगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हालात यह हैं कि कई परिवार को शादी के अवसर पर थोड़े बहुत आभूषण तक खरीदने के लिए काफी सोचना पड़ता है। अनेक मध्यमवर्गीय परिवारों को मजबूरी में विवाह टालने पड़ रहे हैं। उन्होंने मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि एक ओर सरकार महिला सशक्तीकरण के बड़े बड़े दावे कर रही है और दूसरी ओर उच्च इंपोर्ट ड्यूटी, भारी जीएसटी और सट्टेबाजों व जमाखोरों पर कार्रवाई न कर महिलाओं की जीवनभर की बचत को लगातार मूल्यहीन बनाया जा रहा है।
डांगी ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों में आम महिलाओं और परिवारों को सजा मिल रही है। जबकि, जमाखोरों और सट्टेबाजों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करे और कीमती धातुओं पर करों की समीक्षा करे। साथ ही उन्होंने जमाखोरी पर भी सख्त कार्रवाई करने की मांग की है ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
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इस मुद्दे पर विपक्ष यहीं नहीं रुका। शून्यकाल के दौरान केरल से सीपीआई एम के सांदस वी. शिवदासन ने शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की मांग उठाई। जबकि उनकी ही पार्टी के डॉ. जॉन ब्रिटास ने हवाई किरायों में बेतहाशा वृद्धि पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के विमानन क्षेत्र में कुछ कंपनियों का एकाधिकार बन गया है जिससे यात्रियों के हितों और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ रहा है।
कुल मिलाकर विपक्ष ने राज्यसभा में यह संदेश देने की कोशिश की कि महंगाई, खासकर सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, केवल बाजार का विषय नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक न्याय का सवाल बन चुकी है। विपक्ष का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो इसका सबसे ज्यादा खामियाजा ग्रामीण भारत, महिलाएं और मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ेगा।
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