इंदौर के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री वाले अध्यापक, 74 शिक्षकों की नियुक्ति पर उठे सवाल
इंदौर के सांवेर में 2006-07 में फर्जी डीएड-बीएड डिग्री पर नौकरी पाने वाले 74 शिक्षकों पर लोकायुक्त ने शिकंजा कसा है। 2021 से जारी जांच में कई अंकसूचियां जाली पाई गई हैं।
इंदौर। इंदौर जिले के सरकारी स्कूलों में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों का मामला एक बार फिर सामने आया है। लोकायुक्त संगठन ने शिक्षा विभाग से 74 ऐसे शिक्षकों का रिकॉर्ड तलब किया है जिन्हें संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी डीएड और बीएड की अंकसूचियां लगाने के आरोप में संदिग्ध माना गया है। लोकायुक्त के पत्र के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
लोकायुक्त द्वारा भेजे गए पत्र में इन 74 शिक्षकों को संदिग्ध मानते हुए उनकी पहली नियुक्ति से लेकर वर्तमान पदस्थापना तक का पूरा ब्योरा मांगा गया है। इसमें प्रथम नियुक्ति आदेश, नियुक्ति के समय प्रस्तुत की गई डीएड और बीएड की अंकसूचियां, सेवा पुस्तिका का पहला पेज, नियुक्ति से संबंधित सभी एंट्रीज, मर्जर ऑर्डर की कॉपी, वर्तमान पदस्थापना स्कूल जैसी जानकारी शामिल है।
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जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त को यह शिकायत हाल ही में प्राप्त हुई थी कि इंदौर जिला शिक्षा विभाग में पदस्थ 74 शिक्षकों ने साल 2006-07 में आयोजित संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। ये सभी नियुक्तियां सांवेर जनपद पंचायत के माध्यम से की गई थी। इनमें से अधिकांश शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पदस्थ हैं। जबकि, कुछ शिक्षक शैक्षणिक और अकादमिक कार्यों से भी जुड़े हुए हैं।
इस मामले की जड़ें साल 2021 से जुड़ी हैं। जब सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करने वाले 77 शिक्षकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने जांच करवाई जिसमें अधिकांश शिक्षकों की डिग्रियां फर्जी पाई गई थी। जांच के दौरान माध्यमिक शिक्षा मंडल से अंकसूचियों के सत्यापन की अनुशंसा की गई थी।
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जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 45 शिक्षकों की अंकसूचियों का मिलान कर अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौंपी थी। इसके बाद चार प्राचार्यों की एक समिति गठित की गई जिसने मई 2024 में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि संविदा शाला शिक्षक परीक्षा में प्रस्तुत की गई कई अंकसूचियां माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी ही नहीं की गई थी। कई मामलों में एक ही रोल नंबर पर अन्य परीक्षार्थियों की अंकसूचियां दर्ज मिलीं जिससे दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और संदेहास्पद साबित हुए।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर सितंबर 2024 में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने हाइयर सेकेंडरी स्कूल सांवेर, गर्ल्स हाइयर सेकेंडरी स्कूल सांवेर, हाइयर सेकेंडरी स्कूल चन्द्रावतीगंज, हाइयर सेकेंडरी स्कूल डकाच्या, हाइयर सेकेंडरी स्कूल मांगल्या, हाइयर सेकेंडरी स्कूल धरमपुरी और हाइयर सेकेंडरी स्कूल अजनोद संकुल के प्राचार्यों को संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
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इसके बावजूद लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी किसी भी संकुल द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। इस बीच फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षक लगातार सेवा में बने हुए हैं। मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी ने कहा है कि 74 शिक्षकों से जुड़ा मामला उनके संज्ञान में है और इसकी समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि दस्तावेज देखने के बाद आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।




