कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित नतीजों ने एक बार फिर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इसी बीच राज्य की नवगठित सरकार ने चौंकाने वाला निर्णय लिया है। पक्षिम बंगाल में SIR कराने वाले अधिकारी को शुभेंदु सरकार में चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल को सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। मनोज की देखरेख में ही विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल में वोटर लिस्ट में विशेष गहन संशोधन (SIR) कराया गया था। इसमें मतदाता सूची से लगभग 91 लाख वोटर्स के नाम हट गए थे।
इतना ही नहीं रिटायर्ड IAS अधिकारी सुब्रत गुप्ता को भी मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है। सुब्रत को बंगाल में SIR के दौरान ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया था। TMC नेता साकेत गोखले ने इस कदम को 'बेहद बेशर्मी भरा बताया है। गोखले ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस कदम से पता चलता है कि BJP और ECI चुनाव चुराने के मामले में खुलेआम सामने आ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अदालतें अंधी हैं या इसमें मिलीभगत है।
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने भी इन नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, 'ये नियुक्तियां ECI और BJP के बीच खुली मिलीभगत और सांठगांठ को दर्शाती हैं। अब तो इस मिलीभगत को छिपाने की कोई कोशिश भी नहीं की जा रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि ये नियुक्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि ECI निष्पक्ष नहीं था और उसने पूरी तरह से BJP को फायदा पहुंचाने के मकसद से काम किया। रमेश ने कहा कि चुनाव के दौरान 27 लाख लोगों को वोट करने से रोक दिया गया। ECI ने BJP को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए इस काम को बड़ी ही चालाकी से अंजाम दिया।