ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती और लूट का मामला दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। राजेश सिंह चंदेल वर्तमान में भोपाल ग्रामीण में डीआईजी पद पर पदस्थ हैं। विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया ने 11 मई को परिवाद स्वीकार करते हुए यह कार्रवाई की। मामले में थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेन्द्र नाथ यादव, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा को भी आरोपी बनाया गया है।

कंप्लेन में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने एक धोखाधड़ी मामले में समझौता कराने के नाम पर लाखों रुपये की अवैध वसूली की। शिकायतकर्ता अनूप राणा का दावा है कि पहले उससे 5 लाख 80 हजार रुपये लिए गए और बाद में थाने बुलाकर करीब 25 लाख रुपये और मंगवाए गए। रकम देने के बावजूद लगातार और पैसे की मांग की जाती रही थी। मांग पूरी नहीं होने पर उसे झूठे तरीके से मामले में साजिशकर्ता बनाकर जेल भेज दिया गया था।

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एडवोकेट अशोक प्रजापति के मुताबिक, यह पूरा मामला थाटीपुर थाने में दर्ज 420 के एक केस से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसका भाई विक्रम और सरकारी नर्स चंद्रलेखा जैन समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज था। इसी मामले को निपटाने के नाम पर पुलिस ने कथित तौर पर सौदेबाजी शुरू की थी। अनूप राणा ने बैंक से कर्ज लेकर और रिश्तेदारों से पैसे जुटाकर करीब 30 लाख रुपये का इंतजाम किया था।

शिकायत में कहा गया है कि 24 दिसंबर 2023 को एसआई अजय सिंह सिकरवार अनूप राणा और उसके परिजनों को थाने लेकर पहुंचे थे। वहां उन्हें डराया धमकाया गया और एनकाउंटर में मारने तक की धमकी दी गई थी। आरोप है कि साइबर आरक्षक संतोष वर्मा के जरिए अनूप राणा के घर से 9 लाख 75 हजार रुपये और चंद्रलेखा जैन से 15 लाख रुपये मंगवाए गए थे। यह रकम बैग में भरकर थाने लाई गई और वहीं रख ली गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे पहले वह एसआई सिकरवार को 5 लाख 80 हजार रुपये दे चुका था।

कंप्लेन में यह भी कहा गया है कि रकम लेने के बाद भी पुलिसकर्मियों ने और पैसों की मांग जारी रखी। तत्काल 6 लाख रुपये और दो दिन के भीतर 30 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया गया था। जब मांग पूरी नहीं हुई तो 18 जनवरी 2024 को अनूप राणा को एक ऐसे मामले में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया जिसमें उसका नाम तक शामिल नहीं था। बाद में 8 फरवरी 2024 को उसे हाई कोर्ट से जमानत मिली।

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शिकायतकर्ता ने तत्कालीन एसपी और थाना प्रभारी की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। परिवाद में कहा गया कि इतनी बड़ी वसूली वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं थी। इसी आधार पर सभी आरोपियों पर आपराधिक षड्यंत्र की धारा 120 बी भी लगाई गई है। अनूप राणा और उसके पिता ने उस समय तत्कालीन एसपी से लिखित शिकायत भी की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मामले में सीसीटीवी फुटेज गायब होने का मुद्दा भी सामने आया है। कंप्लेन के साथ पेश किए गए 30 जून 2025 के कारण बताओ नोटिस में उल्लेख है कि थाटीपुर थाने के सीसीटीवी सिस्टम की हार्ड डिस्क से 3 जनवरी 2024 से पहले का डाटा डिलीट या फॉर्मेट कर दिया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पैसों से भरे बैग थाने लाए जाने के फुटेज जानबूझकर हटाए गए थे। 

कोर्ट के निर्देश पर फुटेज मांगे गए थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं कराए जा सके। बाद में एडिशनल एसपी रेडियो से कराई गई जांच में भी रिकॉर्डिंग डिलीट होने की पुष्टि हुई। शिकायतकर्ता ने कोर्ट को उस बैग का रंग तक बताया था जिसमें रकम लाई गई थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस दीपक अग्रवाल ने बताया कि डकैती एक्ट में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं होता। ऐसे मामलों में सत्र न्यायालय से राहत मिलना मुश्किल होता है। हालांकि, हाई कोर्ट आरोपियों को जमानत दे सकता है। ऐसे में सभी आरोपियों को गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ सकती है।

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