इंदौर में नगरीय विकास एवं प्रशासन में कैलाश विजयवर्गीय को भाई कहा जाता है। यह संबोधन उनकी सहायता करने की तत्परता तथा दबंग व्यवहार के कारण मिला है। भाई के लिए समर्पित समर्थकों को बीते कई सालों से यह नागवार गुजर रहा है कि उनके नेता को किए का पूरा परिणाम नहीं मिलता है। कहां तो कैलाश विजयवर्गीय एक समय सीएम पद के दावेदार थे और कहां अब प्रदेश में उन्हें अलग-थलग करने की राजनीति होती है।  

ऐसे में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद कैलाश विजयवर्गीय के आंसू निकल आए तो समर्थकों के घाव फिर हरे हो गए। यूं तो ये आंसू खुशी के थे मगर समर्थक तड़प गए कि सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में कैलाश विजयवर्गीय को बुलाया नहीं गया जबकि मुख्यमंत्री बने सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी में शामिल कराने में केंद्रीय नेतृत्व के साथ-साथ तत्कालीन बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों से पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले सुवेंदु अधिकारी टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आए, जिससे नंदीग्राम में ममता बनर्जी को चुनौती मिली और पार्टी को मजबूती मिली। 

बंगाल में सरकार बनने के बाद 11 मई को कैलाश विजयवर्गीय ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीर में वे मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हैं। समर्थकों ने कैलाश विजयवर्गीय की मुस्कान के पीछे की पीड़ा को भी पढ़ लिया। इस तस्वीर को देख समर्थकों ने उनकी प्रशंसा करते हुए दर्द भी बयां किया। उनके कार्यों का उल्लेख करते हुए समर्थकों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कैलाश विजयवर्गीय के साथ बार-बार ऐसा क्यों होता है? क्यों उनके परिश्रम को नजरअंदाज कर दिया जाता है? बंगाल चुनाव जीतने पर बीजेपी ने इतने नेताओं को बुलाया फिर कैलाश विजयवर्गीय जैसे जमीन तैयार करने वाले नेता को क्यों भूला दिया गया?

सांसद दर्शन चौधरी के दर्शन हुए खोटे

नाम बड़े और दर्शन खोटे कहावत इस बार नरसिंहपुर में हुआ। सालेचौका में गेहूं खरीदी केंद्र पर किसान 7 दिन से खड़े थे लेकिन उनकी खरीदी नहीं हो पा रही थी इसी बीच बीजेपी सांसद दर्शन सिंह चौधरी वहां पहुंचे तो किसान और गुस्सा गए। किसानों ने सांसद को खूब खरी-खोटी सुनाई. उनसे कहा "यदि कुछ नहीं कर सकते हैं तो यहां से चले जाएं।" सांसद के साथ चल रहे समर्थकों ने किसानों से आराम से बात करने की नसीहत दी तो मामला और गर्म हो गया। सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि गेहूं खरीदी का काम राज्य सरकार का है। इससे उनका लेना-देना नहीं है। वे तो किसानों की समस्या जानने आए थे। आक्रोशित किसानों ने कहा कि किसानों से हमदर्दी है तो सांसद उनके साथ ही रूक जाएं। बात बिगड़ती देख सांसद दर्शन सिंह गेहूं खरीदी केंद्र से चले गए। 

इसके बाद कांग्रेस नेता केदार सिरोही ने एक घटना का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में केदार सिरोही ने किसानों की समस्या हल करवाने की पहल की थी? तब दर्शन सिंह चौधरी ने राजनीतिक दांव चलते हुए मुलाकात को विफल करने का काम किया था। सिरोही ने लिखा कि दर्शन भाई दुनिया गोल है। आज जब किसान हकीकत पूछ रहे हैं, जवाबदेही की बात कर रहे हैं तो उन्हें बुरा क्यों लग रहा है? 

ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास से बीजेपी नाराज, क्या है राज?

मध्यप्रदेश के राजनीतिक जगत की यह चौंकाने वाली खबर है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास समर्थक को बीजेपी ने नोटिस दे दिया है। और भी हैरत वाली बात यह है कि यह नोटिस सिंधिया के कट्टर विरोध् नेता केपी यादव पर टिप्पणी के बाद जारी हुआ है।  

केपी यादव ने ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके गढ़ कहे जाने वाले गुना से लोकसभा चुनाव में हराया था। तब से ही केपी यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। उस वक्त सिंधिया कांग्रेस में थे और केपी यादव बीजेपी में। लेकिन जब से सिंधिया ने बीजेपी ज्वाइन की है, तब से सिंधिया ने केपी यादव को साइड लाइन करने की हर संभव कोशिश की है। पार्टी ने केपी यादव का टिकट भी काट दिया था। सिंधिया के पुरजोर विरोध के बाद भी केपी यादव पिछले दो सालों से राजनीतिक पुनर्वास की आस लगाए बैठे थे। 

यह इंतजार बीते दिनों पूरा हुआ जब सिंधिया के विरोध के बाद भी बीजेपी ने केपी यादव को मप्र स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन का अध्यक्ष बना दिया। केपी यादव को पद मिलने के बाद सिंधिया ने तो सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा लेकिन भोपाल में उनके समर्थक कृष्णा घाटगे ने मोर्चा खोल दिया था। गुना में आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित अन्य सभी नेता थे वहां केपी यादव नहीं थे। इसी पर कृष्णा घाटगे ने केपी पर तंज करते हुए बालबुद्धि नेता कहा था। 

इस पोस्ट पर एक्शन लेते हुए बीजेपी जिला इकाई ने सिंधिया के खास समर्थक कृष्णा घाटगे को नोटिस दिया है। असल में सिंधिया खेमे द्वारा केपी यादव पर लगातार हमले के कारण यादव महासभा ने नाराजी जताई थी। समाज की सक्रियता के कारण बीजेपी ने तुरंत कार्रवाई की। यादव महासभा की नाराजगी दूर करने क् लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी केपी यादव के साथ निकटता दिखाई है। यही कारण है कि कृष्णा घाटगे को नोटिस वास्तव में सिंधिया खेमे को नसीहत माना जा रहा है।  

फर्जी नियुक्ति पर बीजेपी नेता को डिप्टी सीएम की बधाई

एमपी में गजब की सरकार चल रही है। सरकार ने नियुक्ति की नहीं फिर भी सोशल मीडिया पर नियुक्ति आदेश वायरल हो गया। और तो और, इसी आधार पर नेताजी का बधाइयां मिल गईं, पोस्टर लग गए। बधाई देने वालो में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला भी शामिल थे। 

हुआ यूं कि बीते दिनों जब विभिन्न निगम मंडलों में नियुक्ति के कई आदेश एक साथ जारी हुए तब सोशल मीडिया पर सिंगरौली विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल की नियुक्ति का भी एक आदेश सोशल मीडिया पर दिखाई दिया। इस आदेश को देख वे बीजेपी नेता वीरेंद्र गोयल और उनके समर्थक खुश हो गए। जश्न शुरू हो गया। बीजेपी नेता वीरेंद्र गोयल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से बधाइयां लेने पहुंच गए। वे यहीं नहीं रूके, बल्कि उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से भी बधाइयां लीं और मिठाइयां भी खा ली। इस मौके के फोटो, वीडियो शेयर हुए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिठाई खाते हुए भी फोटो वायरल हुई।

इस तरह बीजेपी नेता वीरेंद्र गोयल 8 दिनों तक जश्न मनाते रहे। बाद में पता चला कि  नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने तो इस तरह का कोई नियुक्ति आदेश जारी ही नहीं किया। बल्कि जिस अधिकारी  के साइन उस वायरल आदेश पर थे उस नाम का कोई आईएएस है ही नहीं। इस खुलासे के बाद बीजेपी नेता वीरेंद्र गोयल का जश्न भी ठंडा पड़ गया और उत्साह भी लेकिन इस घटना से पोल खुल गई कि सरकार कैसे काम रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए फर्जी पत्र ने बड़े बड़े नेताओं को अपनी उंगलियों पर नचा लिया। इन नेताओं के स्टॉफ ने भी जांच नहीं की कि जिस नेता को मिठाई खिलाने के फोटो वे पोस्ट कर रहे हैं वह नियुक्ति हुई ही नहीं है।