करीब 8 महीने के इंतजार के बाद मध्य प्रदेश बीजेपी को नए प्रदेश संगठन महामंत्री मिले हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस बार भी चर्चा में चल रहे सभी नामों को नकार कर चौंकाने वाले नाम पर मुहर लगाई है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव के दौरान वाराणसी में संगठन महामंत्री की बेहद अहम भूमिका निभाने वाले चंद्रशेखर को मध्यप्रदेश भेजा है।
बीजेपी में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री का त्रिकोण ही पार्टी की गतिविधियों का सूत्रधार होता है। संगठन महामंत्री आमतौर पर संघ की ओर से भेजा गया ऐसा केंद्र होता है जो प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री यानी संगठन और सत्ता के बीच तालमेल का कार्य भी करता है और आवश्यक होने पर उनपर प्रभाव भी जमाता है। मध्यप्रदेश बीजेपी की राजनीति में कुशाभाऊ ठाकरे के समय से आरंभ हुई संगठन महामंत्री की शृंखला में बीते कुछ सालों में कप्तान सिंह सोलंकी, माखनसिंह, अरविंद मेनन, सुहास भगत और हितानंद शर्मा तक पहुंची। सभी संगठन महामंत्रियों ने सत्ता व संगठन के साथ तालमेल और अपने अधिकार की पूर्ति के लिए मिल कर कार्य करने के सूत्र को अपनाया।
जनवरी में हितानंद शर्मा को हटाए जाने के बाद यह पद रिक्त था। इस दौरान संघ से जुड़े आधा दर्जन नेताओं के नाम इस पद के लिए चर्चा में रहे लेकिन बीजेपी ने चुना मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रहने वाले चंद्रशेखर को। चंद्रशेखर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं। उनकी गिनती पर्दे के पीछे रहकर सशक्त रणनीति निर्माता के रूप में होती है। यही वजह है कि उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र बनारस में संगठन महामंत्री की अहम भूमिका सौंपी गई। उस चुनावी अभियान में उनकी संगठनात्मक कुशलता की काफी सराहना हुई थी।
उन्हें मध्यप्रदेश भेजा जाने का अर्थ यहां की राजनीति पर केंद्र की नजर का और सख्त होने जैसा माना जा रहा है। खासकर तब जब मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के रिश्तों को लेकर तरह-तरह कर चर्चाएं हैं। दोनों नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करने की कोशिशें भी की हैं। संयुक्त पत्रकार वार्ता में सवाल पूछे जाने पर दोनों ने मतभेद की खबरों को अफवाह बताया और अपनी मित्रता का जिक्र किया था। माना जा रहा है कि एमपी बीजेपी का तीसरा पावर सेंटर बने चंद्रशेखर अब बीजेपी को टाइट और राइट करेंगे। चंद्रशेखर अगले चुनाव तक एक ऐसा पावर सेंटर होंगे जो सत्ता और संगठन पर अंकुश की तरह होगा तथा असंतुष्ट नेताओं के लिए आश्रय केंद्र भी।
नितिन गडकरी को को दिखता है एमपी का करप्शन
मध्यप्रदेश में बहुत करप्शन है। यह बात किसी ओर केंद्रीय मंत्री या सत्ता से जुड़े किसी व्यक्ति को भले ही नहीं दिखाई दे लेकिन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को जरूर दिखाई देती है। उनतक शिकायतें पहुंचती हैं और वे सार्वजनिक मंच से ये खुलासा भी करते हैं। बीते सप्ताह जब वे भोपाल आए तो उन्हें फिर मध्यप्रदेश का भ्रष्टाचार दिखाई दिया। उन्होंने आरटीओ में करप्शन पर मंच से ही टिप्पणी की। 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने बेबाक अंदाज में कहा कि आरटीओ यानी परिवहन विभाग के ऑफिसर ध्यान रखिए... मुझे मालूम नहीं, लेकिन बहुत से ऑफिसर बड़े गांधीवादी हैं। गांधी जी की नोट दिखाई देती है, तो फटाफट ठप्पा (मंजूरी) लगा देते हैं।
गडकरी के ऐसा कहने से कांग्रेस को सरकार की आलोचना का अवसर मिल गया है। इससे पहले 19 अक्टूबर, 2024 को भोपाल के ही एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि कि डीपीआर बनाने वाले तो इतने महान लोग हैं कि इन्हें पद्म भूषण और पद्मश्री मिलना चाहिए क्योंकि इंजीनियरिंग के लिहाज से जितने गंदे काम हो सकते है वे करते हैं। कुछ सालों पहले बैतूल-भोपाल हाईवे की खराब सड़क की पोल तब खुली जब खुद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी उस पर से गुजरे। उन्होंने हाईवे की हालत पर अफसरों से यहां तक कह दिया था कि क्या ठेकेदारों से पैसे ले रहे हो! वे मध्य प्रदेश में बनाई जा रही खराब सड़क पर माफी भी मांग चुके हैं।
मध्यप्रदेश की अपनी यात्राओं के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यहां के सिस्टम और भ्रष्टाचार पर तीखी टिप्पणियां की है मगर सिस्टम है कि सुधर नहीं रहा है। यह बात भी है कि जो करप्शन गडकरी को दिख रहा है वह मध्यप्रदेश सरकार को क्यों नहीं दिखाई दे रहा है?
नरोत्तम मिश्रा के पास सुनाने को रह गई कहानियां
एमपी के पूर्व गृहमंत्री व बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दतिया उपचुनाव में न टिकट मिला और न अब तक कोई पद मिला है। समर्थक इस बात से नाराज और निराश भी है शायद इसीलिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा माहौल बनाए रखने में जुटे हुए हैं। अपने चिरपरिचित अंदाज में वे कभी कोई किस्सा सुनाते हैं, कभी काव्य पंक्ति के माध्यम से तंज करते हैं। लोग खोजते रह जाते हैं कि बात किसके लिए कही गई है और निशाना किस तरफ है। ऐसा ही हुआ जब वे शिवपुरी पहुंचे। शिवपुरी में उन्होंने सांप और जुगनू की कहानी सुनाई।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ‘मुझसे मेरे एक मित्र ने पूछा कि क्या कारण है कि अपन तो कुछ बोल ही नहीं रहे है और फिर भी ये अलोचनाएं कर रहे है। मैंने कहा कि मुझे नहीं मालूम यार मैं राजनीतिक आदमी हूं कोई भी चीज वायरल हो जाती है। पर एक किस्सा याद आ रहा है वो सुन ले। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ‘एक सांप एक जुगनू का पीछा कर रहा है। सांप लगातार जुगनू के पीछे पीछे चल रहा था। जुगनू ने एक जगह रुककर पूछा कि सांप मेरी तेरी कोई दुश्मनी है, कोई पुरानी आदवत हूं, तो बोला नहीं… फिर मेरी जान के पीछे क्यों पड़ा है। सांप ने कहा कि न तेरी मेरी दुश्मनी है न कोई अदावत है, मेरे को तेरी चमक देखी नहीं जा रही है।’ नरोत्तम के इस बयान पर वहां मौजूद कार्यकर्ता नारे लगाने लगे ‘दादा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ है। हमारा नेता कैसा हो, नरोत्तम मिश्रा जैसा हो।’
इस तरह उन्होंने जो किस्सा सुनाया वह भी एक तरह का तंज था। कार्यक्रम में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मण समाज की आलोचना पर शायराना अंदाज में कहा, "जुगनुओं ने शराब पी ली है, अब तो सूरज को गालियां देंगे।" इस तरह विभिन्न आयोजनों में संकेत में पार्टी की अंदरूनी राजनीति पर संदेश दे जाते हैं। कहा जा रहा है कि जब तक पार्टी में कोई नया काम नहीं मिलता है तब तक माहौल बनाए रखने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा के पास कई कहानियां हैं।
कांग्रेस नेता पीसी शर्मा की सक्रियता चर्चा में
पूर्व मंत्री और भोपाल में कांग्रेस नेता पीसी शर्मा की सक्रियता चर्चा में हैं। भोपाल में आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से जब मास्टर प्लान में देरी का मामला उठा और सरकार के दोष उजागर हुए तो पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान के लिए 31 घंटे का उपवास किया। भोपाल शहर में जब नगर निगम आवासीय क्षेत्रों में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर रहा था तब बीजेपी के नेताओं और विधायकों की सक्रियता नहीं थी लेकिन पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान में देरी पर जन आक्रोश को सरकार की तरफ मोड़ने का यत्न किया।
इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन में भी वे पीछे नहीं रहे बल्कि पूरी ताकत से बैरिकेड्स पर चढ़ कर विरोध दिखाने में भी आगे रहे। उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाए जा रहे निर्माण के क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उज्जैन स्थित पुश्तैनी मकान के हिस्से को तोड़े जाने पर पीसी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि यह हथौड़ा इसलिए चला है क्योंकि उज्जैन में लंबे हथौड़े चलने वाले हैं। उन्होंने मांग की कि सीएम डॉ. मोहन यादव और उनकी बहन का घर जितना तोड़ा गया है, आम जनता के साथ भी वैसा ही न्याय और समानता का व्यवहार होना चाहिए।