टोक्यो। जापान की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने पद संभालने के महज तीन महीने बाद ही संसद को भंग करने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही देश में 8 फरवरी 2026 को मध्यावधि चुनाव कराए जाने की घोषणा कर दी गई है।
संसद भंग करने की औपचारिक घोषणा जापान की संसद के स्पीकर फुकुशिरो नुकागा ने की। उन्होंने निचले सदन को भंग करने से जुड़ा आधिकारिक पत्र सदन में पढ़कर सुनाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ताकाइची ने यह कदम अपनी लोकप्रियता का लाभ उठाने के लिए उठाया है। अक्टूबर में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उनकी लोकप्रियता में लगभग 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) पिछले कुछ वर्षों में खोया हुआ राजनीतिक आधार फिर से मजबूत करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत यह चुनावी फैसला लिया गया है। निचले सदन में कुल 465 सांसद होते हैं। संसद भंग होने के साथ ही अब जापान में 12 दिनों का चुनाव प्रचार अभियान चलेगा।
बता दें कि सत्तारूढ़ गठबंधन लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) और जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) को 2024 के चुनाव में नुकसान हुआ था। इस समय गठबंधन के पास निचले सदन में बेहद मामूली बहुमत है, जबकि ऊपरी सदन में बहुमत नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री साने ताकाइची अपनी लोकप्रियता का फायदा उठाकर पूर्ण बहुमत से सत्ता में आना चाहती हैं।
वहीं, प्रधानमंत्री के इस कदम को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि संसद भंग करना लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए सही कदम नहीं है और यह फैसला सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए लिया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब जापान और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है। हाल ही में साने ताकाइची ने संकेत दिए थे कि यदि चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो जापान भी इसमें शामिल हो सकता है।