झाबुआ। मध्य प्रदेश के झाबुआ के उत्कृष्ट स्कूल मैदान में आयोजित महाराज नो मेलो में सोमवार शाम बड़ा हादसा हो गया। मेले में लगा नाव झूला अचानक गिर पड़ा जिससे उत्कृष्ट स्कूल के 14 छात्र-छात्राएं घायल हो गए। दुर्घटना का शिकार हुए लोगों में 13 छात्राएं और एक छात्र शामिल है। इनमें से दो छात्राओं को गंभीर चोटें आई हैं जबकि अन्य को मामूली चोटें आई हैं। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल झाबुआ पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।

हादसा सोमवार शाम करीब चार बजे हुआ जब उत्कृष्ट स्कूल की छात्राएं मेले में घूमने पहुंची थी। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाव झूले पर तय क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से झूला अचानक गिर गया। झूला गिरते ही मेले में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार सुनाई देने लगी। कुछ बच्चों ने झूले से कूदकर खुद को बचाने की कोशिश की जबकि कई बच्चे झूले में फंस गए जिन्हें मौके पर मौजूद लोगों ने बाहर निकाला।

घटना की सूचना मिलते ही झाबुआ के एसपी डॉ. शिवदयाल सिंह पुलिस बल और राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मेले की व्यवस्थाओं तथा सुरक्षा इंतजामों की जांच शुरू कर दी। झूले की तकनीकी स्थिति और अनुमति से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।

जिला कलेक्टर नेहा मीणा ने बताया कि अस्पताल लाए गए सभी 14 बच्चे फिलहाल सुरक्षित हैं। दो छात्राओं को अधिक चोटें आई हैं जिन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और जरूरत पड़ने पर आईसीयू में शिफ्ट किया जा सकता है। कलेक्टर ने कहा कि एक जांच दल गठित कर दिया गया है जो पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। मेले की अनुमति देते समय टेक्निकल टीम सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की राय और जिम्मेदारी की भी जांच की जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, महाराज नो मेलो झाबुआ में पिछले छह सालों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। यह मेला हर साल 1 जनवरी से 20 जनवरी तक चलता है और दिन-रात बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। मेले में आसपास के गांवों और कस्बों से आने वाले ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों की भीड़ खास तौर पर अधिक रहती है। मेले में पांच से अधिक बड़े झूले और करीब 25 छोटे झूले लगाए गए हैं। इसके साथ ही खरीदारी के लिए कई दुकानें और स्टॉल भी सजे हुए हैं। यह मेला हिंदू संगठनों द्वारा दिवंगत आदिवासी संत खूमसिंह महाराज की याद में आयोजित किया जाता है। अब प्रशासन इस बात की गहन जांच कर रहा है कि झूले के संचालन में सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

झाबुआ में हुए इस दर्दनाक हादसे पर सांसद डॉ. विक्रांत भूरिया ने ट्वीट कर संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, “झाबुआ मेले में झूला गिरने से हुआ हादसा अत्यंत हृदयविदारक और पीड़ादायक है। मेरी गहरी संवेदनाएं सभी घायलों और उनके परिजनों के साथ हैं। ईश्वर से सभी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं। प्रशासन से मेरी स्पष्ट मांग है कि राहत एवं उपचार कार्य में कोई लापरवाही न हो और इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। मेलों और सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। जन-सुरक्षा सर्वोपरि है।”