इंदौर। इंसानी दिमाग की गतिविधियों को समझने के लिए आईआईटी इंदौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और EEG तकनीक को मिलाकर शोध किया जा रहा है। वैज्ञानिक अलग-अलग मानसिक परिस्थितियों में दिमाग से निकलने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स का अध्ययन कर रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में ध्यान भटकने, मानसिक दबाव और मेडिटेशन के दौरान होने वाले बदलावों को समझने पर काम चल रहा है।
आईआईटी इंदौर के मेहता फैमिली स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज एंड बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की AI EEG लैब में EEG यानी इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी के जरिए मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके बाद इन सिग्नल्स से मिलने वाले बड़े डेटा का AI की सहायता से विश्लेषण किया जाता है। इसका उद्देश्य अलग-अलग मानसिक अवस्थाओं के दौरान दिमाग के व्यवहार में आने वाले पैटर्न और बदलावों की पहचान करना है।
यह भी पढ़ें:पिपरिया में कार से टकराकर पलटी बस, 30 यात्री घायल, 15 की हालत गंभीर
शोध में युवाओं के डिस्ट्रैक्टेड ब्रेन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पढ़ाई, काम और डिजिटल उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल जैसी परिस्थितियों में ध्यान किस तरह प्रभावित होता है इसे EEG सिग्नल्स के जरिए समझने की कोशिश की जा रही है। इसी तरह तनाव और मेडिटेशन के दौरान मस्तिष्क की गतिविधियों में होने वाले बदलाव भी शोध का हिस्सा हैं।
EEG से एक बड़ी मात्रा में सिग्नल डेटा हासिल होता है जिसका पारंपरिक तरीकों से विश्लेषण करना समय लेने वाला हो सकता है। AI इस प्रक्रिया को तेज करते हुए हजारों सिग्नल्स में मौजूद पैटर्न, समानताओं और बदलावों को पहचानने में शोधकर्ताओं की मदद कर रहा है। इससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझने की संभावना बढ़ती है।
यह भी पढ़ें:शिवपुरी में 10 दिन में एक ही परिवार में 4 बच्चों की मौत, सिंध नदी में नहाने के बाद शुरू हुआ मौत का खेल
आईआईटी इंदौर में शोध का दायरा न्यूरल सिग्नल प्रोसेसिंग तक सीमित नहीं है। ब्रेन कनेक्टिविटी, न्यूरल इंजीनियरिंग और बायोमेडिकल रिसर्च में AI के इस्तेमाल पर भी काम किया जा रहा है। कुछ परियोजनाओं में अल्जाइमर सहित न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़े शुरुआती संकेतों को समझने का प्रयास भी किया जा रहा है।
हालांकि, शोधकर्ताओं के मुताबिक, फिलहाल AI के जरिए किसी बीमारी का सीधे इलाज नहीं किया जा रहा है। वर्तमान प्रयास मस्तिष्क से जुड़े सिग्नल्स और उनमें होने वाले बदलावों को समझने पर केंद्रित हैं। भविष्य में इस तरह के शोध से ब्रेन हेल्थ की स्क्रीनिंग और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के शुरुआती संकेतों की पहचान को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
यह भी पढ़ें:भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन, थाली-डमरू बजाकर किया विरोध