भोपाल। राजधानी भोपाल में लंबित भुगतान से नाराज एकल नल जल योजना के ठेकेदारों ने बुधवार को पीएचई विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय (जल भवन) के बाहर ढोल और नगाड़ों के साथ प्रदर्शन किया। ठेकेदारों का कहना है कि जून 2026 से लगाए गए कई बिलों का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि मामले की जानकारी अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव वित्त तक पहुंचने के बावजूद भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हुआ।
प्रदर्शन के बाद विभाग की ओर से ठेकेदारों से लंबित बिल लगाने को कहा गया है। जल निगम के एमडी वीएस चौधरी कोलसानी ने कहा कि विभाग के पास बजट उपलब्ध है और जिन ठेकेदारों के बिल लंबित हैं उन्हें लगाया जाए ताकि भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। भुगतान में देरी के पीछे पीएचई के प्रमुख अभियंता (ENC) संजय अंधवान और अपर संचालक वित्त अंजू सिंह के बीच फाइलों के मूवमेंट को लेकर बना विवाद भी सामने आया है। एमडी चौधरी कोलसानी ने भी दोनों अधिकारियों के बीच फाइलों को लेकर टकराव की बात स्वीकार की है।
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अपर संचालक वित्त अंजू सिंह की पीएचई में करीब दो महीने पहले पदस्थापना हुई है। पदभार संभालने के बाद उन्होंने भुगतान से संबंधित फाइलों को लेकर पहले अधीनस्थ कर्मचारियों और फिर प्रमुख अभियंता संजय अंधवान से स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद दोनों अधिकारियों के बीच फाइलों की प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आए। विवाद के बीच विभाग के ओएसडी संजीव कुमार गुप्ता ने इसी महीने अंजू सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में वित्तीय भुगतान की प्रगति और कुछ अन्य मामलों में लापरवाही को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
नोटिस में 5 सितंबर को अपर मुख्य सचिव द्वारा SNS स्पर्श प्रणाली से होने वाले भुगतान की समीक्षा का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि जिलों से मांग आने के बाद भी समय पर राशि जारी नहीं होने के कारण भुगतान की प्रगति प्रभावित हुई है। नोटिस में न्यायालयीन मामलों से जुड़े गणना पत्रकों के सत्यापन और अनुमोदन में देरी का भी उल्लेख है। विभाग के अनुसार, इसकी वजह से कुछ अवमानना मामलों का समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा था। अंजू सिंह से तीन दिन में जवाब मांगा गया था और जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की बात कही गई थी।
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वहीं, लंबित बिलों से जुड़े दस्तावेजों में अपर संचालक वित्त की ओर से फाइलों के मूवमेंट और वित्तीय पोर्टल के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल दर्ज किए गए हैं। एक टिप्पणी में 15 जून से 12 अगस्त 2026 के बीच प्रस्तुत नोटशीट में फाइलों के मूवमेंट का उल्लेख करते हुए वित्त अधिकारी के IFSC पोर्टल लॉगिन और पासवर्ड के कथित अनधिकृत इस्तेमाल की बात कही गई है।
टिप्पणी में यह भी कहा गया है कि प्रमुख अभियंता द्वारा बजट आदेशों पर स्वयं हस्ताक्षर किए जाते रहे और वित्त अधिकारी को कार्य संपादन से अलग रखा गया। IFMIS पोर्टल पर किए गए कार्यों की समीक्षा को भी जांच का विषय बताया गया है। अपर संचालक वित्त ने 5 सितंबर तक प्रस्तुत फाइलों में बजट आवंटन आदेशों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया पर भी आपत्ति दर्ज की। उनके अनुसार, कुछ आदेशों में प्रमुख अभियंता के हस्ताक्षर मुख्य पृष्ठ पर जबकि वित्त अधिकारी के हस्ताक्षर प्रतिलिपि पर किए गए। जिससे भुगतान की प्रक्रिया में बार-बार देरी हुई।
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एकल नल-जल योजना के ठेकेदारों का कहना है कि जून 2026 में लगाए गए उनके कई बिल अब तक लंबित हैं। भुगतान में देरी के लिए दोनों अधिकारियों की ओर से फाइलों के मूवमेंट को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारी तय किए जाने की स्थिति सामने आई है। इसी भुगतान विवाद के चलते ठेकेदारों ने जल भवन के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि काम पूरा करने के बाद भुगतान लंबित रहने से उनकी परेशानी बढ़ रही है और वे चाहते हैं कि विभाग जल्द से जल्द उनके बिलों का निपटारा करे।