जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और तेज आवाज में बजने वाले डीजे को लेकर सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। नागरिक उपभोक्ता मंच के पदाधिकारियों ने सोमवार को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। मंच ने शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में भी तेज आवाज वाले डीजे पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने और नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग रखी है। कलेक्टर ने शिकायत पर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है।
मंच के संरक्षक डॉ. पीजी नाजपांडे ने कहा कि तेज आवाज के स्वास्थ्य पर असर को लेकर अब तक बुजुर्गों को लेकर ज्यादा चिंता जताई जाती रही है लेकिन हाल में बच्चों और युवाओं से जुड़ी घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल को रोकने की जरूरत बताई।
जबलपुर में दिए गए ज्ञापन के दौरान बैतूल के जेएच कॉलेज में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई 17 वर्षीय प्रतीक्षा वर्मा की मौत का भी उल्लेख किया गया। शुक्रवार रात जुलूस के दौरान छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। चक्कर आने के बाद वह बेहोश हो गई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। प्रतीक्षा के परिजनों ने उसकी मौत के लिए तेज डीजे की आवाज को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
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मंच ने उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में सितंबर 2026 में गणेश विसर्जन के दौरान हुई एक अन्य घटना का भी हवाला दिया। वहां कक्षा 2 में पढ़ने वाली 7 वर्षीय वैष्णवी तिवारी की तेज डीजे और कंपन के बीच मौत की घटना सामने आई थी। इसी तरह सितंबर 2021 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी तेज डीजे और शोर के बीच ढाई साल के बच्चे की मौत का मामला सामने आया था।
डॉ. नाजपांडे ने महाराष्ट्र के नागपुर में चलाए गए नो डीजे अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिलादंडाधिकारी की पहल के बाद गणेश विसर्जन जैसे बड़े आयोजन भी डीजे के बिना किए गए। उन्होंने इसी तरह की व्यवस्था जबलपुर और पूरे मध्यप्रदेश में लागू करने की मांग की।
मंच का कहना है कि जबलपुर में कई स्थानों को साइलेंस जोन के तौर पर चिन्हित किया गया है लेकिन इसके बावजूद अलग-अलग इलाकों में तेज आवाज में डीजे बजने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। संगठन ने प्रशासन से पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाकर स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है।
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पदाधिकारियों ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के संबंध में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई आदेश मौजूद हैं। उनका आरोप है कि नियम और न्यायालय के निर्देश होने के बावजूद धार्मिक व सामाजिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे का इस्तेमाल जारी है। मंच ने प्रशासन से नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कर ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने की मांग की है।