मध्य प्रदेश में मानसून के सक्रिय सिस्टम ने एक बार फिर बारिश का जोर बढ़ा दिया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण डिंडौरी, पन्ना, रीवा, सतना, छतरपुर समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार को निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है।
लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए मैहर और डिंडौरी में शुक्रवार को स्कूल बंद रखे गए हैं। डिंडौरी में आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद कर दिए गए हैं। पन्ना में भी लगातार बारिश और नदी और नालों के उफान को देखते हुए शुक्रवार और शनिवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
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पन्ना जिले में बारिश का असर नदी और नालों पर साफ दिखाई दे रहा है। केन, मिढ़ासन, व्यारमा और पतने नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। तेंदुघाट बांध के पांच गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन की ओर से नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। उमरिया में भी जलस्तर बढ़ने के बाद संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन के जोहिला डैम के दो गेट एक-एक मीटर तक खोल दिए गए हैं। डैम से पानी छोड़े जाने के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
मैहर में गुरुवार देर रात मर्जुआ नाला पार करते समय एक ट्रक गहरे पानी में फंस गया। ट्रक का नंबर MP19 ZR 7976 है और वह करीब सात फीट पानी में फंस गया था। स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मामले की जानकारी मिलते ही मुकुंदपुर चौकी प्रभारी नागेश्वर मिश्रा मौके पर पहुंचे। पानी का बहाव तेज होने के बावजूद वे तैरकर ट्रक तक गए। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से ट्रक तक रस्सा पहुंचाकर बांधा गया। इसी रस्से के सहारे ड्राइवर राकेश साहू और क्लीनर इंद्रकमल द्विवेदी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस तरह समय रहते दोनों की जान बच गई।
मौसम विभाग ने आज निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर सहित 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, पन्ना, सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान कई स्थानों पर 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है।
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इसके अलावा भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश जारी रहने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून टर्फ और अन्य मौसमी सिस्टम सक्रिय होने से फिलहाल पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर बना हुआ है। 20 से 24 अगस्त के बीच बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकती हैं। इसका असर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 599 मिमी यानी करीब 23.6 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 675.1 मिमी यानी 26.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में बारिश करीब 11 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भी सामान्य से 11 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
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प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में बारिश सामान्य से करीब 19 प्रतिशत तक कम रही है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में सामान्य से 4 से 58 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं।
आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 5 से 39 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। हालांकि, कुछ जिलों में तस्वीर इसके उलट है। अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में अब तक सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
इस मानसून सीजन में जून के दौरान प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में हुई तेज बारिश से स्थिति कुछ सुधरी और जुलाई का बारिश कोटा पूरा हो गया। हालांकि, इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आने के कारण कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं। अगस्त के अंतिम सप्ताह से पहले एक बार फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हुआ था लेकिन इसके बावजूद सीजन में कुल बारिश अभी सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बनी हुई है। मध्य प्रदेश में पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य वार्षिक बारिश करीब 38 से 39 इंच के बीच रहती है।
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