इंदौर के सयाजी होटल की किचन में मिली गंभीर गड़बड़ियां, एक साथ रखे मिले वेज और नॉन वेज सामग्री

इंदौर के सयाजी होटल में खाद्य विभाग और एफएसएसएआई की संयुक्त जांच में 66 किलो बिना पैकिंग नॉनवेज, जंग लगे बर्तन, खराब खाद्य सामग्री और चूहे-कॉकरोच मिले।

Updated: Aug 21, 2026, 11:21 AM IST

इंदौर के नामी सयाजी होटल और क्लब की किचन में खाद्य सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। गुरुवार रात करीब 10.30 बजे खाद्य विभाग और एफएसएसएआई पश्चिम क्षेत्र की संयुक्त टीम ने अचानक जांच की। निरीक्षण में 66 किलो बिना पैकिंग और निर्माण तिथि के नॉनवेज खाद्य सामग्री, खराब खाद्य पदार्थ, जंग लगे बर्तन और किचन में कॉकरोच व चूहों की मौजूदगी सहित कई खामियां मिली। टीम ने पनीर, नॉनवेज, मूंगफली, सौंफ और ड्रायफ्रूट्स समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए।

जांच के दौरान मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी, एफएसएसएआई पश्चिम रीजन के अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर रितु जाट और तहसीलदार सपना शर्मा समेत अन्य अधिकारी सयाजी होटल के किचन पहुंचे। यहां कोल्ड स्टोरेज में वेज और नॉनवेज सामग्री एक साथ रखी मिली। करीब 66 किलो नॉनवेज बिना पैकिंग के था और उस पर निर्माण तिथि से संबंधित लेबल भी नहीं लगा था। सीफूड, चिकन और मटन को भी अलग-अलग रखने के बजाय साथ में रखा गया था।

टीम को किचन में खाद्य सामग्री के लिए निर्धारित तापमान का पालन होता नहीं मिला। ड्राय स्टोरेज के कंटेनर और नॉनवेज रखने वाले बर्तनों में जंग लगी थी। भोजन तैयार करने वाले प्लेटफॉर्म पर भी जंग पाई गई। होटल परिसर और किचन में कॉकरोच के साथ चूहों का मल मिला। जबकि, जांच के दौरान किचन में चूहे भी दिखाई दिए थे।

सब्जियां रखने वाले स्टोर में सड़े हुए आलू और टमाटर मिले। मूंगफली में फंगस पाई गई। इसके अलावा कई खाद्य उत्पाद उचित लेबल के बिना रखे हुए थे। इन खामियों को देखते हुए खाद्य विभाग ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे।

जांच में यह भी पता चला कि सयाजी होटल के पास एफएसएसएआई का सेंट्रल कैटेगरी लाइसेंस नहीं था। तीन सितारा श्रेणी से ऊपर के होटलों के लिए सेंट्रल और रीजनल दोनों कैटेगरी का लाइसेंस जरूरी है। होटल के उपलब्ध लाइसेंस में नॉनवेज शामिल नहीं था। इसके बावजूद वहां नॉनवेज खाद्य सामग्री तैयार की जा रही थी।

इसके अलावा बिना संबंधित लाइसेंस के बेकरी आइटम और मिठाई बनाने का काम भी संचालित होता मिला। शुगर पाउच पर सयाजी नाम दर्ज था। जबकि, संबंधित उत्पाद या श्रेणी लाइसेंस में दर्ज नहीं थी।

जांच के दौरान कई खाद्य सामग्री किचन की दीवार से सटाकर रखी मिली। उबले आलू के पैकेट पर एक्सपायरी डेट से संबंधित जानकारी मिली। व्हिप टॉपिंग के टेट्रापैक लीक हो रहे थे जिससे संक्रमण की आशंका जताई गई। फ्रिज में रखी कुल्फी पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर दर्ज नहीं था।

फ्रोजन डेजर्ट भी स्टोर में मिला जबकि होटल के मेन्यू में केवल आइसक्रीम दर्ज थी। सूखी खाद्य सामग्री वाले कमरे की फर्श और दीवारों में दरारें मिली। प्लेटों के नीचे भी गंदगी पाई गई थी। ग्रेवी को निर्धारित तरीके के बजाय कमरे के तापमान पर स्टोर किया जा रहा था।

कचरा प्रबंधन में भी नियमों का पालन नहीं मिला। गीले और सूखे कचरे के लिए अलग व्यवस्था नहीं थी। इस्तेमाल किया हुआ तेल सीधे ड्रेनेज में डाला जा रहा था।

इसी कार्रवाई के दौरान खाद्य विभाग ने मुराई मोहल्ला स्थित चाणक्य बालक छात्रावास की किचन का भी निरीक्षण किया। छात्रावास के छात्रों ने शिकायत की थी कि वहां तैयार होने वाला भोजन गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है और उसे खाने के बाद कई छात्र उल्टी-दस्त से बीमार हो रहे हैं।

गुरुवार सुबह जांच के लिए पहुंची टीम को छात्रावास प्रभारी अर्पित गुप्ता मौके पर मिले। उन्होंने खाद्य पंजीयन भी प्रस्तुत किया। हालांकि, निरीक्षण में किचन की स्थिति खराब मिली। वहां सड़े हुए आलू रखे थे और साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी।

किचन में जाले लगे हुए थे, वॉश बेसिन में काई जमा थी और वॉशिंग एरिया में कचरे का ढेर मिला। यहां तक कि बैठने वाली कुर्सियों पर भी फंगस लगी हुई थी। खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता की स्थिति को देखते हुए जांच दल ने छात्रावास की किचन को सील कर बंद करा दिया।