मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। मंगलवार रात से शुरू हुए इस मौसम के कहर से खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, शाजापुर, देवास, सीहोर, आगर-मालवा, शिवपुरी, ग्वालियर, गुना सहित कई जिलों में रबी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। खेतों में खड़ी गेहूं, चना, सरसों, मसूर, प्याज और सब्जियों की फसलें गिर गई या पूरी तरह नष्ट हो गई। कई इलाकों में ओले गिरने से सड़कों पर सफेद चादर जैसी परत जम गई। जबकि तेज हवाओं और बारिश के कारण बिजली आपूर्ति भी बाधित रही थी।

खंडवा जिले में मंगलवार रात तेज बारिश और हवा से फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। खरीफ सीजन में सोयाबीन की मार झेल चुके किसानों के सामने यह दूसरी बड़ी आपदा बनकर सामने आई है। किल्लौद ब्लॉक के गड़बड़ी, हरिपुरा, सेमरूढ़, लछौड़ा, जूनापानी, खेड़ीपुरा, घाघरिया, मालुद, बड़गांव, कुंडिया, बिल्लोद, पाटाखाली और भुलवानी सहित कई गांवों में गेहूं और चने की फसल आड़ी पड़ गई। किसानों का कहना है कि दाना झड़ने का खतरा बढ़ गया है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

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फसल नुकसान का जायजा लेने किल्लौद ब्लॉक पहुंचे कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपालसिंह पुरनी को मौके पर प्रशासनिक बहस का सामना करना पड़ा। तहसीलदार धनाजी गढ़वाल ने कहा कि आड़ी पड़ी फसल धूप और हवा से फिर खड़ी हो सकती है इसलिए कुछ समय बाद सर्वे कराया जाएगा। इस पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कागजी तर्कों से नहीं बल्कि जमीन पर उतरकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाना चाहिए और किसानों को समय पर मुआवजा मिलना चाहिए।

दूसरी ओर राजधानी दिल्ली पहुंचे खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने फोन पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता से बात कर किल्लौद और आसपास के क्षेत्रों में मावठे से हुए नुकसान का सर्वे कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद वे दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री से मिलकर किसानों के मुआवजे का मुद्दा उठाएंगे। कलेक्टर ने राजस्व अमले को मौके पर भेजकर सर्वे कराने का आश्वासन दिया है।

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मौसम का यह कहर केवल खंडवा तक सीमित नहीं रहा। सीहोर, आष्टा, जावर, मेहतवाड़ा, श्यामपुर, हिंगोनिया और आसपास के इलाकों में तेज बारिश के साथ बेर और नींबू के आकार के ओले गिरे। उज्जैन जिले की खाचरौद-नागदा, महिदपुर और तराना तहसीलों में गेहूं की फसल गिरने से दाना भराव प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। रतलाम में गेहूं, अफीम और चने की फसल को आंशिक नुकसान हुआ है। शाजापुर और देवास में 40 से 50 प्रतिशत तक फसल खराब होने का दावा किया जा रहा है। जबकि, खरगोन जिले में गेहूं की फसल 40 प्रतिशत तक प्रभावित बताई जा रही है। शिवपुरी जिले के रामखेड़ी और आसपास के गांवों में चना, सरसों और गेहूं की फसलें ओलों की मार से पूरी तरह बर्बाद हो गई है।

प्रदेशभर में किसानों की बिगड़ती हालत को देखते हुए विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जितू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि कटाई से महज कुछ समय पहले गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलें उस समय बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने सभी प्रभावित जिलों में तत्काल गिरदावरी और वास्तविक नुकसान के आधार पर सर्वे कराने, प्रति हेक्टेयर समुचित मुआवजा देने और फसल बीमा के मामलों में बीमा कंपनियों को तुरंत भुगतान के निर्देश देने की मांग की है।

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साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने भी ओलावृष्टि का वीडियो साझा कर सरकार से किसानों को तत्काल राहत देने की मांग की है। वहीं, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जहां भी किसानों को नुकसान हुआ है वहां सरकार उसे संज्ञान में लेकर कार्रवाई करेगी। इस बीच कांग्रेस विधायक सचिन सुभाषचंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हालिया ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रदेश के कई इलाकों में अन्नदाताओं की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने जय जवान, जय किसान का नारा देते हुए सरकार से तत्काल व्यापक सर्वे कराकर किसानों को शीघ्र और उचित मुआवजा देने की मांग की है। 

मौसम विभाग के अनुसार ओलावृष्टि के बाद प्रदेश में ठंड और घने कोहरे का असर बढ़ गया है। कई जिलों में सुबह 10 बजे तक धूप नहीं निकली और विजिबिलिटी कम रही थी। प्रशासन ने पटवारी और कृषि अमले को प्रभावित क्षेत्रों में भेजकर सर्वे के निर्देश दिए हैं लेकिन किसान आशंकित हैं कि यदि समय रहते सही आकलन और मुआवजा नहीं मिला तो पहले से कर्ज और बढ़ती लागत से जूझ रहे किसानों के लिए हालात और बिगड़ जाएंगे।

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