मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश का सिलसिला थमते ही तेज गर्मी ने दस्तक दे दी है। रविवार को राज्य के पांच शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। जिसमें रतलाम सबसे गर्म रहा जहां पारा 41 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 16 अप्रैल से प्रदेश में लू का असर शुरू होगा और तापमान में और बढ़ोतरी होगी।

मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, प्रदेश में अब गर्मी का तीखा दौर शुरू हो चुका है। हालांकि, 15 अप्रैल को एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होगा लेकिन इसका असर बेहद सीमित रहेगा और इससे तापमान में कोई खास गिरावट नहीं आएगी। विभाग ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में गर्म हवाएं चलेंगी और विशेष रूप से मालवा-निमाड़ क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहेंगे।

रविवार को तापमान के आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। रतलाम के बाद खजुराहो में 40.4 डिग्री, धार और मंडला-नर्मदापुरम में 40.2 डिग्री दर्ज किया गया था। दमोह, रीवा और टीकमगढ़ में पारा 39.5 डिग्री रहा था। जबकि, खरगोन में 39.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया था। रायसेन, छिंदवाड़ा, उमरिया, सतना और मलाजखंड में तापमान 39 डिग्री के आसपास रहा था। बैतूल और सागर में 38.8 डिग्री, गुना और शाजापुर में 38.4 डिग्री, नौगांव में 38.2 डिग्री और खंडवा में 38.1 डिग्री दर्ज किया गया। सिवनी और सीधी में पारा 38 डिग्री पर पहुंच गया था।

प्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो इंदौर में 39.2 डिग्री, भोपाल में 38.6 डिग्री, उज्जैन में 38.5 डिग्री और जबलपुर में 38.7 डिग्री तापमान रहा था। जबकि, ग्वालियर अपेक्षाकृत कम 36.1 डिग्री पर दर्ज किया गया था।

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 16 अप्रैल से धार, खरगोन, खंडवा, सीधी और सिंगरौली जिलों में लू चलने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर के समय धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। हल्के और सूती कपड़े पहनने की भी सलाह दी गई है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।

गौरतलब है कि इस साल अप्रैल की शुरुआत सामान्य से अलग रही जब 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। इस दौरान ग्वालियर में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। जबकि, 15 से ज्यादा जिलों में ओले गिरे और करीब 45 जिलों में बारिश हुई थी।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अप्रैल और मई को प्रदेश में गर्मी के चरम महीने माना जाता है। खासतौर पर अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से तापमान तेजी से बढ़ता है। इस बार भी यही पैटर्न देखने को मिल रहा है। जहां शुरुआती दिनों की असामान्य बारिश के बाद अब भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है।

इस साल फरवरी और मार्च में भी मौसम ने कई बार करवट बदली थी। फरवरी में चार बार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई थी। जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा और सरकार को सर्वे कराना पड़ा था। मार्च में भी पहले गर्मी और फिर दूसरे पखवाड़े में बारिश का दौर चला था। जिसमें 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश और 17 जिलों में ओलावृष्टि दर्ज की गई थी। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें प्रभावित हुई थी।