प्रयागराज। वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ और प्रयागराज में शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार की घटना को लेकर सियासत गर्म है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इन दोनों घटनाओं की निंदा की है। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शंकराचार्य जी से माफी मांगनी चाहिए।
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बनारस में आधुनिकीकरण के नाम पर कॉरिडोर बनाने के लिए कई पौराणिक काल के मंदिरों को तोड़ा गया। स्थानीय सनातन धर्म के लोगों ने इसका विरोध किया। लेकिन हद तो तब हो गई जबकि मणिकर्णिका घाट, जहां मान्यता हैं कि दाह संस्कार करने से मोक्ष प्राप्त हो जाता हैं, उसे तोड़ा जा रहा है। वहां देवी अहिल्याबाई जी के द्वारा निर्मित मंदिर की मूर्ति तोड़ दी गई।'
सिंह ने प्रयागराज की घटना को लेकर कहा कि शंकराचार्य जी के साथ पुलिस ने जो व्यवहार किया हैं, घोर आपत्तिजनक हैं, प्रधानमंत्री जी को उनसे माफी मांगना चाहिए। शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार की घटना पर AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पवन खेड़ा ने कहा, 'शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ जो दुर्व्यवहार किया गया है, उससे हम सभी दुखी हैं। इस घटना के बाद से शंकराचार्य जी अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार में किसी को फर्क नहीं पड़ रहा है। कोई और सरकार होती तो शर्मसार हो चुकी होती। मोदी सरकार ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के खिलाफ पूरी ट्रोल आर्मी झोंक दी है, क्योंकि वे इनके सामने नतमस्तक नहीं होते। राजा के सामने संत नतमस्तक नहीं होते, संत के आगे राजा नतमस्तक होता है। ये जो शर्मनाक घटना हुई है, इसके खिलाफ प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए। वरना वे सनातनी नहीं... 'धनातनी' ही थे और यही कहलाएंगे।'
दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन पालकी और अपने शिष्यों व भक्तों के साथ संगम में स्नान की अनुमति न मिलने पर विवाद हुआ था। इस दौरान शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। संगम नोज पर भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शंकराचार्य को सीमित संख्या में पैदल जाकर स्नान करने का विकल्प दिया था, लेकिन वह इस पर राज़ी नहीं हुए।
उधर, प्रयागराज में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अनशन दूसरे दिन भी जारी है। वह रविवार दोपहर से ही अपने शिविर में अनशन पर बैठे हुए हैं और लगातार प्रशासन से गंगा स्नान को लेकर अपनी मांग पर अड़े हैं। शंकराचार्य की मांग है कि पुलिस और प्रशासन उन्हें पूरे प्रोटोकॉल के साथ संगम नोज तक ले जाकर गंगा स्नान कराए।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि चालीस वर्षों से ऐसे ही गंगा स्नान करने जाते रहे हैं, कभी कुछ ग़लत नहीं हुआ। लेकिन इस बार मुझे अपमानित करने और शारीरिक क्षति पहुँचाने का इरादा था। भीड़-भगदड़ के बहाने मेरी हत्या भी करवाई जा सकती थी।