गुना। मध्य प्रदेश के गुना शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्रों में दूषित पेयजल की सप्लाई का गंभीर असर अब बच्चों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों में इन इलाकों से डेढ़ दर्जन से अधिक बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती चिकित्सकीय जांच में कई बच्चों में पीलिया और हेपेटाइटिस ए जैसी बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं। मामले के सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती अधिकांश बच्चे बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के निवासी हैं। परिजनों का आरोप है कि पिछले करीब 15 दिनों से उनके घरों में नलों के माध्यम से बदबूदार और गंदा पानी पहुंच रहा है। शुरुआत में बच्चों का इलाज निजी डॉक्टरों से कराया गया लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई बच्चों को लगातार उल्टी-दस्त, तेज पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में लंबे समय से जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित है। वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि लालाराम लोधा ने बताया कि उन्हें रविवार को हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में एक बीमार बच्चे की जानकारी मिली थी। जब वे परिवार से मिलने पहुंचे तो पता चला कि पूरे इलाके में कई बच्चे समान लक्षणों से पीड़ित हैं और जिला अस्पताल में भर्ती हैं। इसके बाद उन्होंने तत्काल नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। बाद में भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार भी अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
लालाराम लोधा ने जनस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र की कई पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हैं। जिनके जरिए नालियों का दूषित पानी पेयजल आपूर्ति में मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों से पहले भी पाइपलाइन सुधार की मांग की गई थी लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। टंकी की सफाई को लेकर उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों के अनुसार, करीब चार महीने पहले जल टंकी की सफाई हुई थी लेकिन मुख्य समस्या वितरण नेटवर्क में मौजूद टूटी पाइपलाइनें हैं।
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अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजनों ने भी जलापूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राधा बाई नामक महिला ने बताया कि उनका बच्चा तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती है। पहले निजी चिकित्सक से इलाज कराया गया लेकिन सुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल लाना पड़ा। वहीं, रानी जोगी ने बताया कि उनके बच्चे को कई दिनों से पेट दर्द और दस्त की शिकायत थी। हालत इतनी खराब हो गई कि शौच के साथ खून आने लगा था। एक अन्य महिला सकीना बानो ने बताया कि उनकी नातिन भी लगातार उल्टी-दस्त से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती है।
चौंकाने वाली बात यह रही कि पिछले तीन दिनों से एक ही इलाके से बड़ी संख्या में बच्चे जिला अस्पताल पहुंच रहे थे लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते इस संभावित स्वास्थ्य संकट को गंभीरता से नहीं लिया। न तो प्रशासन को तत्काल सूचना दी गई और न ही किसी विशेष अलर्ट की व्यवस्था की गई। रविवार को मामला चर्चा में आने के बावजूद शिशु वार्ड में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं था। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. धाकड़ ही बच्चों का उपचार करते नजर आए थे।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने भर्ती बच्चों की स्थिति की जानकारी ली और चिकित्सकों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पीएचई और नगर पालिका की तकनीकी टीमों को प्रभावित इलाकों में भेजकर जलापूर्ति व्यवस्था की जांच शुरू कराई गई है।
नगर पालिका की टीम ने प्रभावित बस्तियों और संबंधित पानी की टंकियों से करीब आधा दर्जन पानी के नमूने एकत्र किए हैं। इन सैंपलों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट सोमवार को सार्वजनिक किए जाने की संभावना है। इसके अलावा अधिकारियों को क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की पहचान कर उन्हें तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।
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गुना कलेक्टर किशोर कुमार कान्याल ने कहा है कि जब तक पानी के नमूनों की अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में भर्ती बच्चों के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।