नीमच। मध्यप्रदेश ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 950 मेगावॉट क्षमता की दो मेगा सौर परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कर दी हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नीमच में 500 मेगावॉट क्षमता वाले नीमच सोलर पार्क तथा 450 मेगावॉट क्षमता वाले शाजापुर सोलर पार्क का लोकार्पण किया। करीब 2,080 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इन परियोजनाओं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नीमच सोलर पार्क से बिजली महज 2.14 रुपये प्रति यूनिट की न्यूनतम दर पर उपलब्ध होगी। जिसे देश की सबसे कम सौर ऊर्जा दरों में शामिल माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने कहा कि इन दोनों परियोजनाओं से प्रदेश में स्वच्छ और सस्ती बिजली उत्पादन को नई गति मिलेगी। साथ ही बढ़ती ऊर्जा मांग को पर्यावरण अनुकूल तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से प्रदेश की बिजली व्यवस्था लंबे समय तक अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी।
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नीमच सोलर पार्क की अलग-अलग इकाइयों में बिजली की टैरिफ दर 2.14 से 2.15 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। यूनिट-2 में सबसे कम 2.14 रुपये प्रति यूनिट की दर मिली है। जबकि, यूनिट-1 और यूनिट-3 में यह 2.15 रुपये प्रति यूनिट रहेगी। वहीं, शाजापुर सोलर पार्क से उत्पादित बिजली की दर 2.33 से 2.35 रुपये प्रति यूनिट के बीच तय की गई है। सरकार का दावा है कि इतनी कम लागत पर सौर ऊर्जा उपलब्ध होना देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि नीमच तेजी से ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में पहले से 675 मेगावॉट क्षमता की सौर परियोजनाएं संचालित हैं। जबकि, लगभग 1,952 मेगावॉट क्षमता की नई परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। उनके अनुसार, आने वाले समय में नीमच देश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा क्लस्टरों में अपनी पहचान बना सकता है।
कार्यक्रम में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले सोलर ग्लास निर्माण संयंत्र का भूमिपूजन भी किया गया। यह संयंत्र सौर पैनल निर्माण उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। इससे स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
प्रदेश सरकार ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में मुरैना में 440 मेगावॉट क्षमता वाली पहली सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना विकसित करने की जानकारी भी दी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के अनुसार, इस परियोजना में बिजली की दर 2.70 रुपये प्रति यूनिट तय हुई है। इसकी विशेषता यह होगी कि बैटरी स्टोरेज तकनीक की मदद से सूर्यास्त के बाद भी बिजली की आपूर्ति संभव हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में अब लगभग 30 प्रतिशत योगदान स्वच्छ ऊर्जा का हो चुका है। प्रदेश में अब तक 12,018 मेगावॉट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क, ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना और अब नीमच-शाजापुर सोलर पार्क जैसी परियोजनाएं राज्य को देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी राज्यों में शामिल कर रही हैं।
नीमच में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा परियोजनाओं के साथ औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा दिया गया। करीब 1,553.98 करोड़ रुपये की लागत वाली 38 औद्योगिक इकाइयों और विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया। सरकार का लक्ष्य नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन को उत्तर-पश्चिम मध्यप्रदेश के नए औद्योगिक ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में विकसित करना है। जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती मिलेगी।
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केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में हरित ऊर्जा उत्पादन का नया मॉडल बनकर उभर रहा है। उन्होंने बताया कि गांधी सागर पंप स्टोरेज परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल होगी और इसके जरिए ताप विद्युत की तुलना में लगभग आधी लागत पर बिजली उत्पादन संभव होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 2.14 रुपये प्रति यूनिट की सौर ऊर्जा दर मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धि है। साथ ही मुरैना की सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नवाचार साबित होगी क्योंकि इससे रात के समय भी कम लागत पर स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।