सिवनी। मध्य प्रदेश संसाधन विभाग के एक अधिकारी के फैसले ने सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा क्षेत्र में सैकड़ों किसानों की आजीविका पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। भीमगढ़ दांयी तट नहर उपसंभाग, कान्हीवाड़ा के एसडीओ उदयभान मर्सकोले द्वारा सिंचाई के लिए सालों से उपयोग में आ रही एक अहम संरचना को ध्वस्त किए जाने के बाद क्षेत्र में गहरा आक्रोश फैल गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पांच गांवों के किसानों ने जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
मामला चुटका सी माइनर (चैन क्रमांक 137) से जुड़ा है। य हां लगभग 40 साल पहले जल संसाधन विभाग द्वारा एक अड़ाव संरचना (रिपटा) का निर्माण कराया गया था। इसी संरचना के जरिए मुख्य नहर से पानी माइनर में चढ़ता था और चुटका, टिकारी, नद्दीटोला, जंगलटोला और जावना गांवों की करीब एक हजार एकड़ कृषि भूमि सिंचित होती थी। किसानों का कहना है कि नवंबर माह में नवागत एसडीओ ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए जेसीबी मशीन से इस दशकों पुरानी व्यवस्था को तोड़ दिया गया।
किसानों के अनुसार, जब संरचना को गिराया जा रहा था तब इसका तीखा विरोध भी किया था। पुलिस की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम के दौरान अधिकारी ने आश्वासन दिया था कि यदि भविष्य में पानी नहीं चढ़ेगा तो किसान स्वयं अड़ाव बना सकेंगे। लेकिन अब किसानों का आरोप है कि एसडीओ अपने उसी वादे से पीछे हट गए हैं और किसी भी तरह की अस्थायी व्यवस्था की अनुमति नहीं दे रहे हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब किसानों ने सिंचाई के लिए पानी की मांग उठाई। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि एसडीओ मर्सकोले ने किसानों को झूठे मामलों में फंसाने और पिसवा देने जैसी धमकियां दीं। किसानों का कहना है कि जब वे अपनी समस्या बताने के लिए अधिकारी को फोन करते हैं तो उन्हें अपमानजनक जवाब मिलता है और यह कहा जाता है कि उनके पास किसानों के लिए समय नहीं है।
इस समय नहर में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद अड़ाव न होने के कारण माइनर में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। खेतों तक सिंचाई रुकने से फसलें सूखने की कगार पर हैं और किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसी को लेकर किसानों ने कान्हीवाड़ा थाना प्रभारी के माध्यम से जिला प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि सिंचाई व्यवस्था तुरंत बहाल नहीं की गई और कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।