धार। भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस बार भी बसंत पंचमी पर यहां पूजा और नमाज दोनों होंगे। न्यायालय ने हिंदू पक्ष से 12 बजे तक पूजा करने के लिए कहा है। इसके बाद मुस्लिम पक्ष नमाज पढ़ेगा। हिंदू पक्ष शाम 4 बजे से फिर पूजा कर सकेगा। 

दरअसल, धार स्थित भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिमा है। यह पुरातत्व विभाग के अधीन है। हिंदू और मुस्लिम पक्ष के लोगों का अपना-अपना दावा है। कोर्ट के निर्देश के अनुसार हिंदू समाज के लोगों को हर मंगलवार को पूजा करने की इजाजत है। वहीं, मुस्लिम समाज के लोगों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत है। 

वहीं, इस बार जूमे के दिन ही बसंत पंचमी पड़ा रहा है। इसलिए एक बार फिर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हिंदू पक्ष ने 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति के लिए 20 जनवरी को याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है। कल बसंत पंचमी है और सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान होंगे। मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा की जाएगी। इसके बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा। 

हिंदू पक्ष की ओर से यह सुझाव दिया गया कि नमाज शाम 5 बजे के बाद कराई जाए, ताकि पूजा निर्बाध चल सके। इस पर मस्जिद पक्ष ने स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता। अन्य नमाजों के समय में बदलाव संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने एक संतुलित समाधान अपनाते हुए कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज के लिए परिसर के भीतर ही एक अलग और विशेष क्षेत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जहां आने-जाने के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग होंगे, ताकि नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जो व्यवस्था साल 2003, 2013 और 2016 में कायम रखी गई थी जिसमें सामान्य तौर पर मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम जाते हैं। जब वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती ही तो बारह बजे से पहले हिन्दू समाज के लोग जाते हैं और एक से तीन बजे तक मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं। फिर तीन से हिन्दू समाज भी फूल चढ़ा सकते हैं। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करें।