छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ 15 दिन से चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार को पुलिस कार्रवाई के बाद समाप्त हो गया। 3 जुलाई से चल रहे इस आंदोलन को पुलिस ने जबरन खत्म कराया। पुलिस ने कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे लगे प्रदर्शन स्थल को खाली कराकर प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर उनके गांवों तक छोड़ दिया। जबकि 14 दिन से अनशन पर बैठे अमित भटनागर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
यह आंदोलन मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व में चल रहा था। 15 दिनों तक चले इस विरोध में प्रदर्शनकारियों ने जल सत्याग्रह, चिता सत्याग्रह और प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे तरीके अपनाए। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर पिछले 14 दिनों से अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर थे।
आंदोलन की नेता दिव्या अहिरवार ने आरोप लगाया कि रविवार सुबह करीब 5 बजे पुलिस की बड़ी टुकड़ी मौके पर पहुंची और मीडिया से बात करने से पहले ही भटनागर और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई प्रोजेक्ट में 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने के लिए की गई है।
वहीं ASP आदित्य पटले ने गिरफ्तारी या हिरासत से इनकार किया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को बसों से उनके गांव भेजा गया है। पन्ना जिले के लोगों को वहां वापस भेजा गया, जबकि बाकी को छतरपुर और आसपास के इलाकों में छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासन के साथ डॉक्टरों की टीम भी गई थी ताकि लोगों की बुनियादी मेडिकल जांच हो सके। महिलाओं को शांतिपूर्वक बसों में बैठाकर घर भेजा गया। यह निर्माणाधीन पुल है और बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ गया है, इसलिए इलाके को सुरक्षित न मानते हुए उन्हें हटाया गया।
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, परियोजना से प्रभावित परिवारों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े मुद्दों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है और पात्र परिवारों के पुनर्वास के लिए पैकेज भी स्वीकृत किया गया है।