जम्मू-कश्मीर में शनिवार रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। पुंछ और किश्तवाड़ जिलों में बादल फटने तथा बाढ़-भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे दर्दनाक हादसा पुंछ के सुरनकोट क्षेत्र में हुआ। वहां भूस्खलन से एक मकान मलबे में दब गया। वहीं, राजौरी में उफनती धारहाल नदी के कारण सैकड़ों वाहन बह गए। दूसरी ओर उत्तराखंड में भूस्खलन के चलते केदारनाथ और कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है। जबकि, अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ से डेढ़ लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
पुंछ जिले के सुरनकोट इलाके में भूस्खलन के दौरान एक मकान पूरी तरह मलबे में दब गया। हादसे के समय घर के अंदर आठ लोग मौजूद थे। राहत और बचाव अभियान के दौरान दो वर्षीय बच्चे सहित पांच लोगों के शव बरामद किए गए। वहीं, किश्तवाड़ के सुर्नू क्षेत्र में बादल फटने से कई घरों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा। जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
राजौरी जिले में लगातार हुई तेज बारिश के बाद धारहाल नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव में लगभग 200 से 250 वाहन बह गए। हालात को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है और प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी हैं।
भारी बारिश और बाढ़ के खतरे को देखते हुए पुंछ पुलिस ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने नागरिकों से नदियों और नालों के पास जाने से बचने, बिना आवश्यक कारण घर से बाहर न निकलने और अत्यंत जरूरी न होने पर सड़कों पर वाहन नहीं चलाने की अपील की है।
राजौरी में बने गंभीर हालात पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बातचीत की। उन्होंने स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और प्रभावित लोगों की सुरक्षा एवं राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
इसके अलावा उत्तराखंड में भी लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के मद्देनजर घोड़े-खच्चरों की सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं। वहीं, पिथौरागढ़ जिले के धारचूला बेस कैंप में कैलाश-मानसरोवर यात्रा के चौथे जत्थे को रोकना पड़ा। इस दल में 50 तीर्थयात्री शामिल हैं। बेस कैंप प्रभारी धन सिंह बिष्ट के अनुसार, गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन होने से गुंजी जाने वाला मार्ग बंद हो गया है।
पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में भी मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, 29 लोग घायल हुए हैं। राज्य में 26 जिले, 328 सर्कल और 576 गांव प्रभावित हुए हैं तथा कुल 1,49,257 लोग इस आपदा की चपेट में आए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाएं अधिक होने के पीछे हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं प्रमुख कारण हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाएं पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं। वहां तापमान कम होने पर नमी तेजी से बादलों में बदल जाती है। संकरी घाटियां और ऊंची चोटियां इन बादलों को लंबे समय तक एक स्थान पर रोक लेती हैं। जब बादलों में अत्यधिक मात्रा में पानी जमा हो जाता है तो वह अचानक तेज बारिश के रूप में गिरता है। यही वजह है कि डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी, सोनमर्ग और कश्मीर घाटी के ऊंचे इलाकों में बादल फटने की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती हैं।