ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर सेंट्रल जेल में नाबालिग राष्ट्रीय स्तर की कराटे खिलाड़ी से दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी कराटे कोच जगवीर जाटव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। गुरुवार शाम जेल के भीतर उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल मौत की असली वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है और प्रशासन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कारणों की पुष्टि होने की बात कही है।

मृतक की पहचान गुना के गोपालपुरा निवासी 40 वर्षीय जगवीर जाटव के रूप में हुई है। हाल ही में विशेष न्यायालय ने उसे सह आरोपी सचिन भटनागर के साथ नाबालिग खिलाड़ी से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोनों करीब एक महीने पहले ही ग्वालियर सेंट्रल जेल भेजे गए थे।

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जेल सूत्रों के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे जगवीर जाटव ने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। जेल प्रशासन ने तत्काल उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत हार्ट अटैक से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। फिलहाल नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

यह मामला साल 2021 में सामने आया था जब गुना के पड़ोसी जिले की रहने वाली 16 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर की कराटे खिलाड़ी ने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि साल 2017 से 2019 के बीच प्रशिक्षण और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान उसके दोनों कोचों ने लगातार उसका यौन शोषण किया था।

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शिकायत के अनुसार, पीड़िता 2017 में एमपी वाडो काई कराटे एसोसिएशन में प्रशिक्षण ले रही थी। अभ्यास के दौरान उसे सप्ताह में कई बार कोच के घर रुकना पड़ता था। इसी दौरान दोनों आरोपियों ने पहले उसका विश्वास जीता और फिर कथित तौर पर उसका शारीरिक शोषण शुरू कर दिया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि सह आरोपी सचिन भटनागर ने प्रेम और शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म किया। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ट्रेनिंग कैंप के दौरान होटल के कमरों तथा सुनसान स्थानों पर भी उसके साथ यौन उत्पीड़न किया जाता था। विरोध करने पर उसे डराया धमकाया जाता और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

जांच के दौरान पीड़िता ने यह भी दावा किया था कि मलेशिया में आयोजित एक प्रतियोगिता के दौरान आरोपियों ने उसे एक अन्य खिलाड़ी के पिता के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया और इसके बदले लाखों रुपये वसूले थे। उसने यह भी आरोप लगाया था कि शादी और बेहतर करियर का भरोसा देकर आरोपियों ने उसकी मां के सोने के गहने भी अपने पास रख लिए थे।

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पीड़िता के मुताबिक, साल 2019 तक उसका लगातार शोषण होता रहा था। कोविड 19 लॉकडाउन के दौरान आरोपियों से उसका संपर्क टूट गया। बाद में जब दोनों ने फिर से उसे खेल में लौटने के लिए दबाव बनाया तो उसने मना कर दिया। इसी दौरान घर में मां को गहनों को लेकर परेशान देख उसने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद लंबी सुनवाई चली और विशेष न्यायालय ने दोनों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर 7-7 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

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