सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में गुरुवार देर रात अचानक बदले मौसम ने किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी। करीब 45 मिनट तक रुक-रुक कर हुई तेज बारिश के कारण कृषि उपज मंडी में खुले में रखा गेहूं भीग गया। जबकि, खेतों में खड़ी फसल पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस बेमौसम बारिश से मंडी और खेत दोनों स्तर पर नुकसान की स्थिति बन गई है।

जानकारी के अनुसार, रात करीब 1:45 बजे से 2:30 बजे के बीच जिले के कई इलाकों में बारिश हुई थी। सीहोर में 2.2 मिमी और इछावर में 9 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। अचानक हुई इस बारिश के चलते मंडी में दुकानों के बाहर रखा गेहूं भीग गया जिसे अब किसान और व्यापारी धूप में सुखाने में जुटे हैं। कई जगहों पर अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।

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कृषि मंडी के व्यापारी सतीश दरोठिया के मुताबिक, बारिश के कारण गेहूं की चमक और क्वालिटी पर असर पड़ेगा जिससे बाजार भाव भी प्रभावित हो सकते हैं। किसानों का कहना है कि यह बारिश ऐसे समय हुई है जब फसल कटाई के करीब है। ऐसे में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा लहसुन और प्याज जैसी अन्य फसलों को भी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले 21 फरवरी को भी जिले के कुछ हिस्सों में बारिश दर्ज की गई थी। इनमें श्यामपुर (1.3 मिमी), आष्टा (4 मिमी) और जावर (3 मिमी) शामिल हैं। करीब एक महीने बाद फिर हुई इस बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बाद इस बारिश से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है।

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सीहोर समेत मध्य प्रदेश के भोपाल, रायसेन और विदिशा में पहले भी जनवरी से फरवरी के बीच हुई बारिश और ओलावृष्टि से सैकड़ों हेक्टेयर में फसलें प्रभावित हो चुकी हैं। ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर के किसानों को भी नुकसान झेलना पड़ा था जिससे रबी सीजन पहले ही दबाव में है।

देश के अन्य राज्यों में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के मथुरा और बरेली में तेज आंधी और बारिश से गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है जिससे उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी की आशंका है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में भी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

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मौसम के इस बदले मिजाज के बीच राज्य सरकारें नुकसान का आकलन कराने और मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं। मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में अधिकारियों को सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। जबकि, किसानों को फसल बीमा योजना के तहत राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च के महीने में इस तरह की अनियमित बारिश जलवायु परिवर्तन का संकेत है जो रबी फसलों के लिए सबसे संवेदनशील समय पर भारी पड़ रही है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे नुकसान की सूचना तुरंत दर्ज कराएं ताकि सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया में देरी न हो और समय पर राहत मिल सके।