अहमदाबाद में फेक करेंसी गैंग का भंडाफोड़, योग गुरु निकला मास्टरमाइंड, आश्रम से 2.9 करोड़ के नकली नोट जब्त
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 2.9 करोड़ के नकली नोटों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मास्टरमाइंड योग गुरु प्रदीप जोटांगिया समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया।
अहमदाबाद। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को एक बड़े नकली करेंसी रैकेट का पर्दाफाश किया है। साथ ही क्राइम ब्रांच ने करीब 2.9 करोड़ रुपये के नकली नोट भी बरामद किए हैं। पुलिस ने स्वयंभू योग गुरु प्रदीप जोटांगिया उर्फ प्रदीप गुरुजी समेत सात लोगों को गिरफ्तार भी किया है। यह गिरोह योग फाउंडेशन की आड़ में सूरत और अहमदाबाद में सक्रिय था और अत्याधुनिक तकनीक व विदेशी सामग्री की मदद से नकली नोट तैयार कर बाजार में खपा रहा था।
क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर में बड़ी मात्रा में नकली नोटों की खेप आने वाली है। इसके बाद टीम ने अहमदाबाद के अमराईवाड़ी इलाके में निगरानी शुरू की थी। संदिग्ध गतिविधियां दिखने पर पुलिस ने एक फॉर्च्यूनर कार को रोका जिसमें सत्यम योग फाउंडेशन से जुड़ा वाहन इस्तेमाल हो रहा था। तलाशी के दौरान 2.38 करोड़ रुपये के 500 रुपये के नकली नोट बरामद किए गए और मौके से एक महिला सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आगे की कार्रवाई में सूरत पुलिस के साथ समन्वय कर 80 लाख रुपये के अतिरिक्त नकली नोट भी जब्त किए गए हैं।
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जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन प्रदीप जोटांगिया कर रहा था। वह खुद को आध्यात्मिक संत बताकर सत्यम योग फाउंडेशन और सत्यम योग एंड हेल्थ सेंटर के नाम से गतिविधियां चला रहा था। असल में इन जगहों का इस्तेमाल नकली नोटों की छपाई और सप्लाई के लिए किया जा रहा था। सूरत के कामरेज क्षेत्र के पारडी गांव स्थित आश्रम में छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक पूरी तरह से संचालित अवैध प्रिंटिंग यूनिट का खुलासा किया। साथ ही वहां से मशीनें, विशेष कागज, विदेशी प्रिंटर और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, नकली नोटों की छपाई के लिए विशेष सिक्योरिटी थ्रेड जैसा कागज चीन से मंगवाया जाता था। इसका भुगतान डिजिटल माध्यमों और कथित तौर पर क्रिप्टो या अंतरराष्ट्रीय पेमेंट चैनलों के जरिए किया गया था। नोटों के डिजाइन और सुरक्षा फीचर्स को असली जैसा बनाने के लिए फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर और एआई आधारित डिजिटल टूल्स का उपयोग किया गया था। जिसकी वजह से आम लोगों के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता था।
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गिरोह नकली नोटों को बाजार में खपाने के लिए सुनियोजित तरीके अपनाता था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी असली 500 रुपये के नोट लेकर बदले में तीन गुना यानी 1500 रुपये के नकली नोट देते थे। एक बड़ी डील में 66 लाख रुपये के असली नोटों के बदले 2 करोड़ रुपये के नकली नोट देने की तैयारी थी। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले बाजारों और छोटे व्यापारियों को निशाना बनाकर नकली करेंसी को धीरे-धीरे सिस्टम में डाला जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि नकली नोटों की सप्लाई के लिए जिन वाहनों का इस्तेमाल किया जाता था उन पर भारत सरकार और आयुष मंत्रालय के फर्जी निशान लगाए गए थे। ऐसा इसलिए ताकि पुलिस जांच से बचा जा सके और आसानी से आवाजाही हो सके। सूरत के वराछा और सारथाना इलाके में भी छापेमारी कर गिरोह के अन्य ठिकानों से नकली नोट और उपकरण जब्त किए गए हैं।
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क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, यह रैकेट पिछले करीब छह महीनों से सक्रिय था और अब तक लाखों रुपये के नकली नोट बाजार में खपाए जा चुके हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध नोट मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने की अपील की है।




