होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालेगा अमेरिका, राष्ट्रपति ट्रंप ने की प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू करने की घोषणा

होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को निकालने का जिम्मा अमेरिका ने लेने का फैसला किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसके लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू करने का ऐलान किया है।

Updated: May 04, 2026, 12:08 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति ऑनल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट फंसे हजारों जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम नाम से एक बड़े समुद्री अभियान की घोषणा की है। यह ऑपरेशन सोमवार सुबह से शुरू होगा। ट्रम्प ने साफ कहा है कि अमेरिका इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा और अगर इस दौरान ईरान ने किसी तरह की बाधा डाली तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।

रविवार को सोशल मीडिया के जरिए ट्रम्प ने जानकारी दी कि कई देशों ने अमेरिका से मदद की अपील की है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके जहाज होर्मुज में फंस गए हैं। उन्होंने इन जहाजों और उनके कर्मचारियों को निर्दोष बताते हुए कहा कि वे हालात के चलते संकट में हैं और अमेरिका उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन(IMO) के अनुसार, इस समय होर्मुज में करीब 2,000 जहाज फंसे हुए हैं। जिन पर लगभग 20,000 नाविक मौजूद हैं। इन जहाजों में तेल और गैस टैंकरों के अलावा मालवाहक और क्रूज जहाज भी शामिल हैं। बीते समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर कम से कम 19 हमले दर्ज किए गए हैं। जिनमें 10 लोगों की मौत और 8 के घायल होने की पुष्टि हुई है।

फंसे हुए जहाजों पर अब जरूरी संसाधनों की कमी भी सामने आने लगी है। खाने-पीने का सामान, ईंधन और पानी तेजी से खत्म हो रहा है। IMO के अधिकारी डेमियन शेवेलियर ने कहा कि आधुनिक दौर में इतने बड़े पैमाने पर नाविकों का एक साथ फंसना अभूतपूर्व है।

इसी बीच अमेरिकी सेना ने जब्त किए गए ईरानी जहाज टूस्का को पाकिस्तान को सौंप दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड(CENTCOM) के प्रवक्ता के मुताबिक, इस जहाज को उसके क्रू के साथ ईरान वापस भेजा जाएगा। अमेरिका ने 21 अप्रैल को इस जहाज को उस समय पकड़ा था जब वह चीन से लौट रहा था और उस पर हथियारों से जुड़ा सामान होने का दावा किया गया था। ईरान ने इस कार्रवाई को समुद्री डकैती करार देते हुए विरोध जताया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती दौर में उसका फोकस ईरान में सत्ता परिवर्तन और उसके परमाणु व बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने पर था। लेकिन अब प्राथमिकता होर्मुज को खोलने और वैश्विक समुद्री व्यापार को सामान्य करने पर आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम व्यावहारिक है और इससे तनाव कम करने का रास्ता भी निकल सकता है।

हालांकि, जोखिम अभी भी बना हुआ है। यदि ईरान इस अभियान का विरोध करता है तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिकी नौसेना को सिर्फ जहाजों की एस्कॉर्टिंग ही नहीं बल्कि उनकी सक्रिय सुरक्षा भी करनी होगी। जिससे टकराव की आशंका बढ़ जाएगी और समुद्री व्यापार के साथ-साथ बीमा लागत पर भी असर पड़ेगा।

इस बीच बीते 24 घंटों में कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज को अमेरिकी सेना के लिए कब्रगाह बना दिया जाएगा। दूसरी ओर पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान ने 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है।