बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में भारी धांधली का आरोप लगाते हुए ECI के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। शिवकुमार ने अपने कैबिनेट मंत्रियों के साथ बेंगलुरु स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) कार्यालय पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वो वहीं बैठे रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि बीजेपी विधायक अभय पाटिल ने खुद चुनाव अधिकारी के पास आकर गलती मानी और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए फर्जी नाम हटाने का लिखित पत्र सौंपा। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक निर्वाचन आयोग से ठोस आश्वासन नहीं मिलता और गड़बड़ी करने वालों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं होते, वह दफ्तर में ही धरने पर बैठे रहेंगे।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा चुनाव आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर जमा किए गए फॉर्म-7 आवेदनों की तत्काल, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। इसके साथ ही जिन विधानसभा क्षेत्रों और पोलिंग बूथों पर असामान्य रूप से भारी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, उनकी विधानसभा और बूथवार गहन पड़ताल कराई जाए।
ज्ञापन में मतदाताओं के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने मांग की है कि मतदाताओं के ईपीआईसी (EPIC) और चुनावी डेटा के स्रोत, अनधिकृत पहुंच या इसके संभावित दुरुपयोग की उच्चस्तरीय जांच हो। साथ ही इस बात का सत्यापन किया जाए कि क्या झूठे और फर्जी ऐतराज दर्ज करवाकर पात्र मतदाताओं को जानबूझकर या चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया गया है।
ज्ञापन में साफ कहा गया है कि पात्र मतदाताओं के मताधिकार की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इस फर्जीवाड़े में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि जब तक निर्वाचन आयोग दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और आवश्यक कदम उठाने का ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।