दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह तथा WFI के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया है। सोमवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। फैसले के दौरान दोनों आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। अदालत से बाहर आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपने लिए खुशी का दिन बताते हुए कहा, "अगर कोई आरोप साबित होता तो मैं फांसी पर चढ़ने को तैयार था। होइहि सोइ जो राम रचि राखा।"

यह मामला जनवरी 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था जब ओलिंपियन पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया समेत कई खिलाड़ियों ने जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। आरोप था कि नाबालिग सहित छह महिला पहलवानों ने शिकायत की थी लेकिन शुरुआती दौर में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अप्रैल 2023 में दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की। हालांकि, बाद में नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी।

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मामले की सुनवाई करीब तीन सालों तक चली थी। 2 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस दौरान कुल 127 सुनवाई हुई और 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पूरे मामले में लगभग 1133 दिनों तक न्यायिक प्रक्रिया चली। बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे। जबकि, 10 मई 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर उनके खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था।

फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह के आवास पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया और फूल बरसाए। उनके बेटे करण भूषण ने सोशल मीडिया पर लिखा कि साजिश नाकाम हुई और सत्य की जीत हुई। वहीं, भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि अदालत के फैसले से स्पष्ट हो गया कि लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके और इससे कुश्ती जगत में खुशी का माहौल है।

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हालांकि, अदालत से बरी होने का अर्थ यह नहीं होता कि व्यक्ति को पूरी तरह दोषमुक्त घोषित कर दिया गया है बल्कि इसका मतलब केवल इतना है कि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं हो सके। कानूनी प्रक्रिया के तहत शिकायतकर्ता महिला पहलवान इस फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें 60 दिनों के भीतर विशेष अनुमति लेकर अपील दायर करने का अधिकार होगा।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 18 जनवरी 2023 को हुई थी। उस दौरान पहलवानों ने जंतर-मंतर पर धरना शुरू कर दिया था। इसके बाद भारतीय ओलिंपिक संघ ने मैरी कॉम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की और खेल मंत्रालय ने WFI की गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए पहलवान 23 अप्रैल 2023 को दोबारा धरने पर बैठ गए थे। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। 

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28 मई 2023 को नए संसद भवन की ओर मार्च के दौरान पहलवानों को हिरासत में लिया गया और जंतर-मंतर का धरना समाप्त कराया गया था। इसके बाद 30 मई को हरिद्वार में मेडल गंगा में प्रवाहित करने का फैसला किसान नेता नरेश टिकैत के समझाने पर टल गया था। अंत में 7 जून 2023 को तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ लंबी बैठक के बाद पहलवानों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था।