प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दुर्व्यवहार की घटना को लेकर देशभर में आक्रोश है। देशभर के संतों ने इस घटना की निंदा की है। प्रसिद्ध निरंजनी अखाड़ा भी शंकराचार्य के समर्थन में उतर आया है। उधर, हरिद्वार के संतों ने इस घटना के विरोध में राष्ट्रपति को खूनी खत लिखने का ऐलान किया है।

दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन पालकी और अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान की अनुमति न मिलने पर शंकराचार्य नाराज हो गए और इसी बात को लेकर उनके शिष्यों ने विवाद किया था। इस दौरान पुलिस पर शंकराचार्य के शिष्यों के साथ मारपीट का आरोप लगा। दुर्व्यवहार से आहत होकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए। उन्होंने 24 घंटे से अधिक समय से अनाज का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया। अन्न के साथ ही जल भी त्याग दिया है।

शंकराचार्य वहीं धरने पर बैठे हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़ गई थी। वे अपने पंडाल में पूरी रात ठंड में धरने पर बैठे रहे। उन्होंने कहा है कि जब तक प्रशासन आकर माफी नहीं मांगता, तब तक हम अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। फुटपाथ पर ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जब भी इतिहास में स्नान करने गए हैं, पालकी में ही गए हैं। हर साल इसी पालकी में जाते रहे हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा। मैं प्रण लेता हूं कि हर मेले के लिए प्रयागराज आऊंगा, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं रहूंगा। फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था करूंगा। शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार की घटना को लेकर देशभर के संतों में आक्रोश व्याप्त है।

निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी रमण पुरी ने कहा कि हमारे सनातन में शंकराचार्य सर्वोच्च पद होता है। उन्होंने कहा कि जिस पीठ के हमारे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हैं, वो तो आदि अनंत काल से है।
रमण पूरी ने आरोप लगाया कि मेले में सबसे ज्यादा सतुआ बाबा फेमस हैं। बस उन्हीं के लिए सारे प्रोटोकॉल लगे हुए हैं। ADM से SP तक जितने भी लोग हैं, सब वहीं नत-मस्तक हो रहे। सरकार ने शंकराचार्य का स्तर बिल्कुल गिरा दिया है।

उधर, हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में उनके शिष्यों और श्री अखंड परशुराम अखाड़े के पदाधिकारियों ने श्रीराम नाम का कीर्तन कर विरोध दर्ज कराया। अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्यों के साथ पुलिस का व्यवहार बेहद निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने संत समाज का अपमान किया है, जो संपूर्ण सनातन धर्म का अपमान है। उन्होंने मांग की कि यूपी सरकार और संबंधित अधिकारी खुद जाकर शंकराचार्य से माफी मांगें।

पंडित अधीर कौशिक ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन माफी नहीं मांगता, तो कल उनके संगठन द्वारा राष्ट्रपति को खून से पत्र लिखकर शिकायत की जाएगी और विरोध प्रदर्शन और तेज किया जाएगा।वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य आचार्य पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि प्रयागराज का माघ मेला मुख्य रूप से साधु-संतों के स्नान के लिए ही आयोजित होता है। यदि प्रशासन व्यवस्था बनाने में असफल रहा तो यह उसकी विफलता है, लेकिन संतों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शिष्यों की चोटियां पकड़कर उन्हें घसीटा और मारपीट की, जो बेहद शर्मनाक है।