बीजेपी की ट्रिपल इंजन सरकार में क्या अफसरशाही बेलगाम हो गई है? अगर यह सवाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी से पूछा जाए तो वे हां कहेंगे। वे पुलिस की अनसुनी से इस कदर परेशान हो गए कि एसपी के चेंबर के बाहर धरने पर बैठने को मजबूर हुए।
पूर्व गृह मंत्री के धरने पर बैठने की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। एसपी अमित कुमार कैबिन से बाहर निकल कर आए और हिम्मत कोठारी को अपने कक्ष में ले जाकर चर्चा की। इसके बाद एसपी ने थाना प्रभारी को शिकायत के मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए। पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी की पीड़ा यह है कि पुलिस ने कार्रवाई तक की जब वे धरने पर बैठे, अन्यथा तो टीआई से लेकर एसपी तक कोई शिकायत पर ध्यान नहीं दे रहा था। यूं भी उनकी शिकायत मीसाबंदी रहे बसंत पुरोहित के प्लॉट पर कब्जे से जुड़ी थी।
पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने मीडिया से कहा कि यदि आगे भी कार्रवाई नहीं होगी तो वे पार्टी से इजाजत लेकर आमरण अनशन पर बैठेंगे। बीजेपी नेताओं को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को देखना चाहिए कि आम जनता की सुनवाई हो रही है या नहीं। ऐसे तो अराजकता फैल जाएगी। अपने गृह नगर में पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी की राजनीतिक अवसान की कथा अलग है मगर चेहरा देख कर तिलक करने की आदि ब्यूरोक्रेसी का व्यवहार दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है। जब मीसाबंदी और बीजपी नेताओं की यह दशा है तो आम शिकायतों की दुर्दशा का कहना ही क्या?
एसीएस मैडम की खरी-खरी और सरकार की चुप्पी
अपर मुख्य सचिव (एसीएस) पंचायत एवं ग्रामीण विकास दीपाली रस्तोगी खरी-खरी कहने के लिए जानी जाती हैं। एक बार फिर उनकी साफगोई चर्चा में है। कुछ माह पहले दो अन्य एसीएस के साथ हुई उनकी बहस चर्चा में आई थी। इस बार उन्होंने सीएम डॉ. मोहन यादव की समीक्षा बैठक बेबाकी से सिस्टम की लूपहोल की बात की। उन्होंने ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट की बदइंतजामी पर नाराजगी जताई।
गौरतलब है कि भोपाल में पहली बार हुई ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट की अव्यवस्थाएं खबरें बनी थीं लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस बिंदु पर खुल कभी बात नहीं हुई। इतना ही नहीं, एसीएस दीपाली रस्तोगी ने जलप्रदाय योजना की कमियों पर बात की। अंदरखाने की खबर यह है कि उन्होंने बैठक में कहा कि कमरे की बातें बाहर नहीं जानी चाहिए। उनकी दूसरी बातों पर तो नहीं लेकिन इस बात पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने इतना जरूर कहा कि ऐसा कहेंगी तो बातें जरूर बाहर जाएंगी। एसीएस की प्रतिक्रिया जरूर चर्चा में रही कि कुछ अफसर खरी-खरी कह रहे हैं मगर उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
देवास पटाखा कारखाने में आग, बस एक जांच समिति!
हरदा की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद प्रदेश भर में प्रशासन ने ऐसे मामलों पर चुस्ती दिखाई थी मगर सारे कवायद कुछ दिनों में ठंडी पड़ गई। कार्रवाई तो दूर लगता नहीं है कि हरदा विस्फोट से मिले सबक याद भी रखे गए हैं। तभी तो देवास के टोंककलां में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ और आधा दर्जन श्रमिकों की मौत हुई जबकि 25 से ज्यादा घायल हुए। यह विस्फोट और निर्दोष की मौत प्रशासनिक लापरवाहियों का नतीजा है।
श्रम विभाग की इस शुरुआती रिपोर्ट ने प्रबंधन की उन गंभीर लापरवाहियों को भी उजागर कर दिया है, जो इस हादसे की नींव बनीं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कारखाना अभी पूरी तरह बनकर तैयार भी नहीं हुआ था। निर्माणाधीन कारखाने में ही जल्दबाजी दिखाते हुए पटाखे बनाना शुरू कर दिया गया था। बुनियादी सुरक्षा ढांचे की जांच किए बिना ही धड़ल्ले से बारूद का खेल चल रहा था।
पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय के खिलाफ एनएसए लगाया गया है और मुख्य आरोपी मुकेश विज को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। लापरवाही बरतने वाले एसडीएम और एसडीओपी समेत 4 प्रशासनिक अधिकारी सस्पेंड किए गए हैं। इस मामले में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने जांच शुरू कर दी है। मगर इस कार्रवाई को महज खानापूर्ति माना जा रहा है। इसके पीछे वजहें भी हैं। विस्फोट स्थल पर भारी मात्रा में अवैध बारूद, एसिड और केमिकल का बिना सुरक्षा मानकों के भंडारण हो रहा था। इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधि प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी। इस लापरवाही पर निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित कर असली जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया है।
पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं इसके बाद बार-बार जांच कमेटियां बनाई जाती है लेकिन अवैध पटाखों की दुकानों या गोदामों पर स्थाई रोक नहीं लगाई जाती। इस बार भी कुछ निलंबन और एक जांच आयोग बना कर बात टाल दी गई है।
रिटायर्ड आईएएस की सलाह, डर या कुछ और?
रिटायर्ड आईएएस नियाज़ खान की एक सलाह चर्चा में है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि भारत में मुस्लिमों के प्यार पर लव जिहाद का पहरा है इसलिए मुस्लिम हिंदू लड़कियों से प्यार न करें। प्यार में फंसे तो जेल होगी और तुम्हें भारत में अब बचाने वाला कोई नहीं है सिवाय अल्लाह के। जो प्यार कर रहे हैं तत्काल प्यार को अलविदा कहें और मुस्लिम लड़की से ही मोहब्बत करें। सॉलिड सलाह।
कभी किताब लिख कर ब्राह्मणों का गुणगान करने वाले नियाज खान की यह सलाह तब आई तब भोपाल में हिंदू लड़की के साथ मुस्लिम लड़के के पकड़े जाने और युवक की पिटाई के बाद हंगामा हुआ है। ऐसे में रिटायर्ड आईएएस नियाज खान की इस सलाह के कई अर्थ हैं। एक तो डर का माहौल है और उस पर यह कहना कि अब तुम्हें भारत में बचाने वाला कोई नहीं है, तुम सब अल्लाह के भरोसे हो। यह एक तरह से इशारा है कि सरकार में सुनवाई नहीं है। दूसरा वे उस सोच को भी पुष्ट कर रहे हैं जो प्यार को जाति, धर्म में बांधती है।