केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को गुना में अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य का विरोध झेलना पड़ रहा है। बीजेपी के कद्दावर नेता पन्नालाल शाक्य आरएसएस पृष्ठभूमि से आते हैं। वे लगातार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे को असहज करने वाले बयान दे रहे हैं। अब तो उन्होंने तीखे अंदाज में सिंधिया को सुझाव भी दे दिया कि महाराज को चुगलखोरों और चापलूसों से सावधान रहना चाहिए। वे अब चापलूसों के चंगुल में फंस रहे हैं, तो हम उन्हें कहां तक बचाएंगे।

असल में, पन्नालाल शाक्य की नाराजगी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मंत्रियों से हैं। कछ समय पहले गुना में अघोषित बिजली कटौती को लेकर जब विधायक पन्नलाल शाक्य बिजली दफ्तर पहुंचे थे, तो उन्होंने सिंधिया समर्थक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को 'नौटंकीबाज' बताते हुए कहा था कि लोकप्रियता पाने के लिए कभी वे बिजली के खंभों पर चढ़ जाते हैं तो कभी नाली में उतर जाते हैं। जनता को दिखावा नहीं, काम चाहिए। 

हवाई पट्टी के एक पुराने विवाद का जिक्र करते हुए पन्नालाल शाक्य ने गुना के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को लेकर कहा था, "प्रभारी मंत्री ने अहंकार में मुझे पीछे धकेला था। मैंने उनके मुंह पर कह दिया कि तू साइड में हो जा और भाड़ में जा। मैं किसी की खैरात से चुनाव जीतकर नहीं आया हूँ।" गोविंद सिंह राजपूत भी सिंधिया समर्थक मंत्री हैं। बिजली गुल होने के मामले में उन्होंने सिंधिया पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि ग्वालियर सिंधिया की राजधानी है, वहां अंधेरा रहे या हैलोजन जले, हमें मतलब नहीं; हमें गुना की जनता की चिंता है।

इस आक्रामक अंदाज पर विधायक पन्नालाल शाक्य को प्रदेश बीजेपी संगठन ने भोपाल बुला कर समझाया था। भोपाल में संगठन की बात पर सहमति जताने वाले एमएलए पन्नालाल शाक्य गुना जाते ही बदल गए। फिर जब ज्योतिरादित्य सिंधिया चार दिनों के लिए गुना आए तो बैठकों सहित अन्य कार्यक्रमों से पन्नालाल शाक्य गायब रहे। अपनी अनुपस्थिति पर उन्होंने कहा कि क्या हम अपनी लड़की-लड़कों की शादी न करें, बस हर समय मीटिंगों में ही जाते रहें? बच्चों के संबंध समाज में जाकर हमें ही कराने हैं। कोई नेता आकर हमारे बच्चों की शादी नहीं कराता है, हमें सब अच्छी तरह पता है। हमने पांच साल पहले भी देख लिया है और अभी भी देख लिया है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों पर मौखिक हमले और फिर स्वयं सिंधिया के कार्यक्रमों से एमएलए पन्नालाल शाक्य का गायब रहना गुना बीजेपी की राजनीतिक कलह की कहानी कह रहा है। गढ़ में सिंधिया को चुनौती और सलाहें मिल रही हैं और ये सलाहें देने वाले कोई और नहीं उनकी अपनी पार्टी बीजेपी के नेता हैं। 

दतिया में फंस तो नहीं जाएंगे डॉ. नरोत्तम मिश्रा

दतिया में उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। अपनी हार का हिसाब बराबर करने के लिए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पूरी ताकत से जुट गए हैं। समर्थक मानते हैं कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को संकेत मिल गए हैं और इसीलिए वे प्रचार में उतर गए हैं। उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी से टिकट और जनता से वोट मिलना पक्का है। 

दूसरी तरफ, मीडिया में इस आत्मविश्वास को सही नहीं माना जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि हर अपने फैसलों से सबको चौंकाने वाली बीजेपी कहीं इस बार भी कोई अनपेक्षित फैसला तो नहीं करने जा रही है। इस आशंका का कारण अन्य दावेदारों का शक्ति प्रदर्शन भी है। दिल्ली में हो रही बैठक पर नजरें टिकी हुई हैं, जहां सभी संभावित दावेदारों के नामों पर विचार हो रहा है।  

विश्लेषण है कि अगर टिकट मिल भी गया तो कांग्रेस का प्रत्याशी चयन डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राह में बाधा बन सकता है। कांग्रेस सिंपैथी वोट पाने के लिए चुनाव शून्य होने वाले राजेंद्र भारती की पत्नी को टिकट दे सकती है। इसके अलावा पूर्व की छवि भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए मुश्किल बन सकती है। टिकट की घोषणा होते ही इन तमाम कयासों पर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी मगर इतना तो तय है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जीत के प्रति जितने लोग आशान्वित हैं, उतने ही कयास उनकी राह में बाधा को लेकर भी हैं। यानी कभी शिवराज सरकार के संकटमोचक मंत्री रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा की विधानसभा में वापसी में कई संकट हैं। 

पहली मंत्री जिसके नाम पर बजी डुगडुगी, हुई मुनादी 

नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी पहली ऐसी मंत्री बन गई हैं जिनकी जाति को लेकर गाँव–गाँव में मुनादी पिटवाई गई। डुगडुगी बजवाकर आम लोगों से कहा गया कि यदि किसी के पास मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति से संबंधित कोई तथ्य, दस्तावेज या साक्ष्य हों तो वे उन्हें समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। 

नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी कुछ विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। पहले उनके भाई पर गांजा तस्करी करने के आरोप लगे थे। अब वे जाति प्रमाण-पत्र के विवाद के कारण खबरों में हैं। आरोप है कि सतना जिले की आरक्षित सीट रैगांव विधानसभा क्षेत्र की विधायिका प्रतिमा बागरी ने कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र लगाकर चुनाव जीता है। शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने दावा किया है कि मंत्री प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति की जगह राजपूत समाज यानि सामान्य वर्ग से हैं। 

शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति नागौद तहसील के ग्राम वसुधा और हरदुआ मझोल समेत संबंधित क्षेत्रों में डुगडुगी बजवाकर आम लोगों से मंत्री की जाति से संबंधित तथ्य, दस्तावेज या साक्ष्य मांगे गए थे। इसके बाद मंत्री ने छानबीन समिति के सामने स्वयं अपनी पैरवी की। करीब 1 घंटे चली अपनी गवाही में मंत्री प्रतिमा बागरी ने सबूत रखते हुए आरोपों को खारिज कर दिया। समिति के फैसले पर राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की विधायकी टिकी है। चाहे जो फैसला हो, वह ऐसी मंत्री बन गई जिसकी जाति का पता लगाने के लिए मुनादी हुई। 

जनता से जुड़ने की एक और पहल

कांग्रेस सरकार को घेरने और जनता से जुड़ने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रही है। इस क्रम में मानसून सत्र के पहले कांग्रेस मिजाज जानने के लिए जनता के बीच पहुंची है। प्रदेश कांग्रेस ने 'जनसहभागिता अभियान' शुरू करते हुए आम नागरिकों से उनकी समस्याएं, सुझाव और स्थानीय मुद्दे पूछे हैं। योजना है कि जनता से मिले मुद्दों को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाया जाए। इसके लिए कांग्रेस ने व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी भी जारी की है।

तय किया जा रहा है कि जिस व्यक्ति का मुद्दा सदन में उठाया जाएगा, उसे इसकी जानकारी भी दी जाएगी। साथ ही सुझाव देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, ताकि उसे किसी प्रकार की असुविधा या दबाव का सामना न करना पड़े। कांग्रेस की तैयारी है कि कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाने के साथ जनता से प्राप्त सुझावों के आधार पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इस तरह पार्टी की कोशिश है कि सदन के बाहर भी वह जनता से कनेक्ट कर सके और अंदर सरकार को मुसीबत में डाल सके।