ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिख कर कहा था कि अफसरों को कायदे सिखाइए। उन्हें जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना आना चाहिए। मध्य प्रदेश के अफसरों ने दिल्ली की इस सलाह पर ध्यान ही नहीं दिया है। प्रदेश में अफसरों के जलवे के आगे बीजेपी नेता मायूस और निराश हैं।
विभिन्न जगहों से मिल रही शिकायतों के बीच फिलहाल मंदसौर में बीजेपी नेताओं के साथ कलेक्टर अदिति गर्ग के व्यवहार व फटकार की गूंज ज्यादा है। हुआ यूं कि मंदसौर के बीपीएल चौराहे पर प्रशासन द्वारा लगाए गए बेरिकेट्स का कांग्रेस और बीजेपी द्वार विरोध किया जा रहा था। इस मामले पर कांग्रेस के आक्रामक रूख तथा जनता की नाराजगी को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष रमादेवी गुर्जर सहित बीजेपी नेता कलेक्टर से मिलने पहुंचे थे। कलेक्टर मीटिंग में थी तो बीजेपी नेताओं को बाहर बैठा दिया गया। करीब एक घंटे तक नपाध्यक्ष और बीजेपी नेता कलेक्टर कार्यालय में बाहर बैठे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मीटिंग खत्म कर कलेक्टर अदिति गर्ग अपने चेंबर में चली गईं। उन्होंने बीजेपी नेताओं की तरफ ध्यान भी नहीं दिया।
जब कलेक्टर ने बुलाया नहीं तो नपाध्यक्ष और बीजेपी नेता पीछे-पीछे चेंबर में चले गए। अंदर चौराहे से बेरिकेट्स हटाने की मांग की जा रही थी तभी बीजेपी के एक पदाधिकारी ने मोबाइल निकाल कर फोटो क्लिक कर ली। कैमरे कर आवाज आते ही कलेक्टर अदिति गर्ग नाराज हो गईं। उन्होंने फोटो लेने वाले नेताजी को फटकार लगा दी। इसके बाद जो बात शुरू भी नहीं हुई थी वह खत्म हो गई। कलेक्टर ने बीजेपी नेताओं का आश्वासन दे कर रवाना कर दिया। मंदसौर की राजनीति में कलेक्टर के इस व्यवहार तथा बीजेपी नेताओं के अपमान पर चुप रह जाने की गूंज है।
अफसरों की अवहेलना के शिकार ग्वालियर बीजेपी जिला उपाध्यक्ष कंवर मंगलानी को सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत करनी पड़ी है। कंवर मंगलानी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर सीएम डॉ. मोहन यादव को बताया है कि नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय उनका फोन नहीं उठाते हैं। न वे मैसेज का जवाब देते हैं और न व्हाटस अप पर ही कोई मैसेज देखते हैं।
दूसरी तरफ, अफसरों के रवैये को देख सिरोंज बीजेपी विधायक उमाकांत शर्मा नई सब्जी मंडी में कचरे के बीच ही धरने पर बैठ गए। विधायक उमाकांत शर्मा कचरे को न उठाए जाने से नाराज थे। प्रशासन की इस लापरवाही पर वे उखड़ गए। जैसे ही पता चला कि विधायक धरने पर बैठ गए हैं, अफसर भागे-भागे पहुंचे। विधायक ने अफसरों को लापरवाही पर फटकारते हुए काम करने की हिदायत दी। वे तो विधायक थे और अफसर भी छोटे ओहदे के थे, वरना आईएएस-आईपीएस अफसरों की कार्यशैली के आगे बीजेपी के बड़े-बड़े नेता बौने साबित हो रहे हैं।
जल संकट पर हाहाकार, प्लानिंग वाले अफसर चुप
दूषित पानी से तीन दर्जन लोगों की मौत देखने वाले इंदौर में जल संकट गहरा गया है। लोग सड़क पर निकल कर अपनी व्यथा बता चुके हैं। मगर बात इंदौर तक सीमित नहीं है। नगरीय निकायों में जलप्रदाय की स्थिति पर सरकार की रिपोर्ट आंखें खोल देने वाली है। यह रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के 42 फीसदी शहरों में रोज पानी नहीं मिल रहा है। पिछले सप्ताह तक राज्य के 413 नगरीय निकायों में से 162 निकायों में प्रतिदिन पानी की सप्लाई नहीं हो रही थी जबकि 8 निकाय ऐसे हैं जहां दो दिन छोड़कर पानी सप्लाई हो रहा है। जबलपुर के 2 निकायों में तीन दिन में एक बार सप्लाई हो रहा है।
प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर संभाग में भी हालात चिंताजनक हैं। यहां 55 में से 42 नगरीय निकायों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। यानी लगभग 76 फीसदी शहरों में नियमित जलप्रदाय नहीं हो पा रहा। उज्जैन संभाग में भी 67 में से 43 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई हो रही है। यहां करीब 64 फीसदी शहर जल संकट से प्रभावित हैं। भोपाल संभाग में 43 में से 17 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी और जल स्रोतों पर दबाव के कारण आने वाले दिनों में संकट और गहराने की आशंका हैं।
इस जलसंकट पर बीजेपी नेताओं को समझ नहीं आ रहा हैं कि वे क्या करें जबकि 24 घंटे पेयजल वितरण के सपने दिखा कर नगरीय निकायों की विकास योजना बनाने वाले अफसर ‘सब ठीक है’ की रट लगा रहे हैं। पेयजल योजनाओं पर बीते वर्षों में करोड़ों खर्च के बाद भी हालात जस के तस हैं। ये हालात संकेत हैं कि कागजी योजनाओं पर करोड़ों लुटाने की जगह कुछ व्यवहारक दृष्टिकोण से काम किया जाए, अन्यथा राजनेता हाथ मलते रह जाएंगे।
सीएस ने कहा, ये कैसा प्रशासन चला रहे अफ़सर
प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी के हाल ऐसे हैं कि भ्रष्टाचार चरम पर है और अपराधी बेलगाम। जनता तो जनता नेता भी परेशान हैं कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस हालात को सीएस अनुराग जैन भी अच्छे से समझ रहे हैं। तभी उन्होंने कलेक्टर एसपी कांफ्रेंस में सीधे पूछ लिया कि अफसर ऐसा कैसा प्रशासन चला रहे हैं कि जनसुनवाई में लोग जहर खा रहे हैं। अवैध खनन करने वालों पर पुलिस का खौफ नहीं है। कैसे कोई व्यक्ति ट्रेक्टर या बाइक सरकारी अमले पर चढ़ा देने की हिम्मत कर सकता है? यह कैसा सुशासन है?
कानून, पेयजल, कृषि सहित विभिन्न मामलों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने साफ कहा कि यह कलेक्टर और एसपी की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामले न हो ताकि जनता में सुशासन का संदेश जाए। सीएम अनुराग जैन कह तो सही रहे हैं लेकिन मैदान में अफसरों की कार्यशैली का आलम यह है कि जनता की सुनवाई हो नहीं रही है और अपराधियों में खौफ नहीं है।
यूपी सीएम योगी को आईपीएस की सलाह, टारगेट क्या है?
दुनिया के सबसे गर्म शहरों में से एक बन चुके यूपी के बांदा को लेकर एमपी के सीनियर आईपीएस राजा बाबू सिंह ने चिंता जताते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को सलाह दी है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को ऑडियो संदेश भेज कर है एडीजी रेलवे रामबाबू सिंह ने कहा है कि सबसे गर्म शहर की पहचान बांदा पर लगा दाग है। ऑडियो मैसेज में उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा है कि मैं राजा बाबू सिंह 1994 बैच का आईपीएस हूं। एडीजे रेलवे के रूप में मध्यप्रदेश में पदस्थ हूं। मैं बांदा जिले का मूलनिवासी हूं। मैं पिछले कुछ दिनों से पेपरों में पढ़ रहा हूं कि बांदा में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच रहा है। बांदा दुनिया के कुछ गर्म स्थानों में से एक बन गया है। ये मेरे लिए बहुत ही आत्मिक कष्ट का विषय है। मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी से ये अनुरोध करूंगा. कि वहां जो अवैध उत्खनन हो रहा है, रेत उत्खनन हो रहा है, पहाड़ियां खत्म की जा रही है, उन पर तत्काल प्रतिबंध लगे।
गर्मी का बढ़ना और अपने गृह क्षेत्र के हालात बिगड़ने पर किसी का भी यूं चिंतित होना स्वाभाविक है मगर जिस तरह से आईपीएस राजाबाबू सिंह ने ऑडियो मैसेज भेजा है, उनके मंतव्य की दिशा तलाशी जा रही है। यह भी एक संभावना जताई जा रही है कि वे उन अफसरों में शामिल होने की दिशा में अग्रसर हैं जो रिटायर होने के बाद राजनीत को कॅरियर बनाने को उत्सुक हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में ऐस अफसरों की संख्या आधा दर्जन थी।