जनता से किए जाने वाले नेताओं के वादों की हकीकत तो सभी जानते हैं मगर नेता जब अपने जैसे नेता के वादों से ही छले जाएं तो आखिर वे अपना दर्द किससे कहें? अपनी ही पार्टी के नेताओं के वादे से मध्‍य प्रदेश के भाजपा नेता छले गए हैं। उनकी हालत ऐसी है कि न वे आक्रोश जता सकते हैं और न बार-बार दिल्‍ली-भोपाल चक्‍कर लगा सकते हैं। हर बार एक खबर उड़ती है कि निगम मंडल में राजनीतिक नियुक्तियां होने का समय करीब आ गया है। कामकाज की समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल फेरबदल ओर विस्तार होगा। भाजपा नेताओं का क्रियाकलाप भी ऐसी खबरों को हवा देता है। बयानों और गतिविधियों को देख कर मुख्‍य धारा में आने के लिए पद का इंतजार कर रहे नेता उम्मीद से भर जाते हैं। फिर दिन पर दिन गुजरते जाते हैं लेकिन न सूची जारी होती है और न नेताओं के इंतजार का फल मीठा होता है। 

अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रतलाम में मीडिया से चर्चा में कहा कि संगठन में बातचीत हो चुकी है। सूची तैयार है, निगम मंडल में नियुक्तियां जल्द होगी। प्रदेश अध्‍यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कहे से कई नेता खुश हो गए तथा अपनी जुगाड़ में जुट गए हैं। हालांकि, कई महीनों से आश्वासन का झुनझुना थामे बैठे नेता अधीरता से पूछ रहे हैं कि प्रदेश अध्‍यक्ष द्वारा कहा गया यह जल्द कब आएगा? ऐसे नेताओं में वरिष्‍ठ नेता भी हैं जो कभी मंत्री रहे थे और आज केवल विधायक हैं। इनमें डॉ. नरोत्‍तम मिश्रा जैसे कद्दावर नेता भी हैं जो कभी पॉवर सेंटर थे लेकिन अब खाली हैं।  

सुरेश पचौरी और रामनिवास रावत, निकल पड़े मैदान में

हाशिए पर पड़े भाजपा नेताओं की मुख्‍यधारा में लौटने की  अपनी व्यथा है लेकिन राज्यसभा चुनाव की घड़ी करीब आने पर कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए दो नेता आस के घोड़े पर सवार हो कर मैदान में निकल पड़े हैं। ये नेता हैं, सुरेश पचौरी और रामनिवास रावत। दोनों अलग अलग तरह से सक्रिय हैं कि इस बार उनकी मुराद पूरी हो जाए। 

इस साल अप्रैल से जून के बीच में एमपी की तीन सीटें खाली हो रही है। इनमें भाजपा के खाते की दो और कांग्रेस की एक सीट है। इन सीटों के टिकट के लिए दावेदारी और भाग-दौड़ शुरू हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा जॉर्ज कुरियन को दोबारा मौका दे सकती है। जबकि दूसरी सीट पर सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल पूरा हो रहा है। अभी इसी सीट पर टिकट के लिए कई दावेदार हैं। इनमें पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा व लालसिंह आर्य, पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त विनोद गोटिया, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, इस रेस में शामिल है। युवाओं को मौका मिलने के कयासों के बाद युवा नेताओं में अपनी फिल्डिंग तेज कर दी है। 

भाजपा से सीट के दावेदार इन नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी तथा कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे रामनिवास रावत प्रमुख हैं। रामनिवास रावत ने विजयपुर की जगह भोपाल में अपने समाज का कार्यक्रम आयोजित कर शक्ति प्रदर्शन का प्रयास किया तो कांग्रेस से ही भाजपा में आए पूर्व केंद्रीय राज्‍यमंत्री सुरेश पचौरी दिल्‍ली में शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। विजयपुर के आदिवासी भाजपा नेता सीताराम आदिवासी आरोप लगा रहा है कि मोहन सरकार चुनाव हार चुके रामनिवास रावत को अधिक सहयोग और सम्‍मान दे रही है जबकि मंत्री दर्जा प्राप्‍त नेता को अपमानित कर रहे हैं।  

राजनीतिक आकलन है कि रामनिवास रावत को तो मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सहयोग मिल जाता है लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के लिए यह अभी नहीं तो कभी नहीं जैसा मौका है। उनसे सवाल भी होगा कि यही होना था तो कांग्रेस को छोड़ कर भाजपा में क्‍यों गए? इसीलिए वे पूरी ताकत लगा रहे हैं कि इसबार उनके हिस्‍से में राज्‍यसभा टिकट आ जाए। 

 मोदी के विकास पर यूं बच कर बोली ताई सुमित्रा महाजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्र वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर जारी विकास कार्य ने देवी अहिल्या की प्रतिमा सहित कई आस्था केंद्रों को तोड़ दिया गया है। इस पर मालवा में खासतौर से गुस्सा है। प्रशासन और सरकार का कहना है कि यह तोड़फोड़ मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण के लिए हो रहा है लेकिन कुछ साधु-संत, विपक्षी नेता और भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं का दावा है कि निर्माण के नाम पर विरासत और इतिहास से छेड़छाड़ की जा रही है। मणिकर्णिका घाट के आस-पास हुई तोड़फोड़ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। मणिकर्णिका घाट के आस-पास हो रहे काम पर शुरू हुए विवाद में अहिल्याबाई होल्कर की भी खूब चर्चा हो रही है। दावा किया जा रहा है कि अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को तोड़ दिया गया है। मलबे में इन मूर्तियों के अवशेष भी देखने का दावा किया गया है। 

मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर का नाम कई तीर्थ स्थलों के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए लिया जाता है। अहिल्याबाई ने ही 18 वीं सदी में काशी के मणिकर्णिका घाट सहित कई घाटों का निर्माण करवाया था। इस घाट का निर्माण कराया था। मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य पर उठे विवाद का गुबार इंदौर तक पहुंचा क्‍योंकि इंदौर ही होल्‍कर की राजधानी थी। मामला जन भावना से जुड़ गया है और बात मोदी के क्षेत्र में विकास से जुड़े निर्णय की है। इस कारण भाजपा नेता असमंजस में हैं कि क्या प्रतिक्रिया दें?

मराठी नेता होने के कारण लोकसभा की पूर्व सुमित्रा महाजन भी ऐसे ही संशय में होंगी। तभी तो जन आक्रोश को देखते हुए वे बोली जरूर हैं लेकिन बच बच कर। उन्‍होंने कहा कि ठेकेदार द्वारा जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। इसी दौरान दुर्घटनावश कुछ मूर्तियों को नुकसान पहुंचा है। हल्के धक्के से भी पुरानी संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। उन्होंने इसे दुर्घटना बताया और कहा कि सरकार ने तत्काल काम रुकवाकर नुकसान की भरपाई व संरक्षण के निर्देश दिए हैं। ताई नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन की प्रतिक्रिया ऐसे है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे यानी जनता का आक्रोश भी शांत हो जाए और मोदी सरकार की आलोचना भी न हो।

खा गए मूर्तियों का पैसा, कैसी यह सरकार है 

भाजपा की डबल-ट्रिपल इंजन की कही जाने वाली सरकार में क्या-क्या नहीं हो रहा है। कफ सिरप, पानी से बच्चे और लोग मर रहे हैं। नगर निगम के ठेके वाले स्लॉटर हाउस में गाय काटी जा रही हैं। अब खुलासा हो रहा है कि महापुरुषों की प्रतिमाओं में भी डाका डाला जा रहा है। यानि, मणिकर्णिका घाट पर प्रतिमाओं के खंडन का मामला एक तरफ मध्‍यप्रदेश में भ्रष्‍टाचार के कारण महान नेताओं की छवि भंजन दूसरी तरफ। महाकाल लोक में फाइबर की प्रतिमा लगाने पर विवाद हो ही चुका है। बाद में इस भ्रष्‍टाचार के शिकार हुए भाजपा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी और अब आदिवासी जननायक टंट्या भील का नंबर है। 

ताजा मामला खरगोन का है। खरगोन के बिस्टान नाका तिराहा पर 15 नवंबर 2025 को आदिवासी जननायक और क्रांति सूर्य टंट्या मामा की मूर्ति स्थापित की गई थी। मूर्ति के लिए 40 लाख की राशि स्‍वीकृत की गई थी। मूर्ति क्रय करने के आदेशों में स्पष्ट रूप से ब्रॉन्ज, मार्बल या संगमरमर की मूर्ति का उल्‍लेख था। इसके बावजूद फाइबर की मूर्ति लाकर स्थापित कर दी गई। कलेक्टर दफ्तर से 12 नवंबर 2025 को जारी आदेश में मूर्ति स्थापना की अनुमति देते हुए साफ लिखा गया था कि प्रतिमा का निर्माण पक्के पत्थर अथवा धातु से होना चाहिए। शर्तों का उल्‍लंघन कर फाइबर की प्रतिमा होने का राज खुला तो आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों ने इसे टंट्या मामा के सम्मान के साथ खिलवाड़ बताया। दबाव बढ़ता देख नगर पालिका और जिला प्रशासन को अपना रुख बदलना पड़ा। अब तय किया गया है कि फाइबर की मूर्ति हटाकर संगमरमर या अन्य पत्थर की मूर्ति लगाई जाएगी। प्रशासन ने सारी गलती ठेकेदार पर डाल दी है। 

ऐसा ही मामला रीवा का भी सामने आया था। रीवा में महापौर अजय मिश्रा बाबा ने आरोप लगाया था कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से सिविल लाइन में अटल पार्क बना है। मेयर इन कांउसिल ने अटल बिहारी वाजपेयी की धातु की एक प्रतिमा लगाने प्रस्ताव पारित किया था। 94 लाख 72 हजार 255 रुपए की प्रतिमा के लिए निविदा हुई। 25 दिसम्बर को धातु की नहीं फाइबर की प्रतिमा स्थापित की जा रही थी। अजय मिश्रा ने इसे भारत रत्न अटल जी अपमान बताया। इस विरोध के चलते गृहमंत्री अमित शाह द्वारा किया जाने वाला प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम निरस्‍त कर दिया। अपने बचाव में निगम ने कहा था कि धातु की प्रतिमा नहीं बनी थी इसलिए फाइबर की प्रतिमा लगाई जा रही थी। उस वक्‍त विरोध नहीं होता तो अटल जी प्रतिमा की हालत भी टंट्या मामा की प्रतिमा जैसी होती।

ऐसे ही उज्‍जैन के महाकाल लोक में भी धातु की जगह फाइबर की प्रतिमाएं लगाई गई थीं। ध्‍यान देने वाली बात है कि हर मामले में ठेकेदार को दोषी बताया गया लेकिन किसी अफसर या जन प्रतिनिधि को जिम्‍मेदार नहीं माना गया।