कहते है एक तस्वीर हजार शब्दों पर भारी है। मध्यप्रदेश के बीजेपी के तीन तारणहार नेताओं की ऐसी ही तस्वीरों से राजनीति साफ दिखाई दे रही है। पहली तस्वीर डॉ. नरोत्तम मिश्रा की है। वे एक किराना दुकान पर अकेले बैठे हैं। तस्वीर उस वक़्त की है जब बीजेपी की कोर ग्रुप मीटिंग हुई और उसमें डॉ. नरोत्तम मिश्रा शामिल नहीं थे। वे पहुंचे नहीं या बुलाए नहीं गए, इस पर असमंजस है। नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब व सह-प्रभारी रेखा वर्मा की उपस्थित में हुई भारतीय जनता पार्टी कोर ग्रुप की बैठक अहम् थी क्योंकि इसमें संगठन बदलाव की भूमिका दिखाइ दी।
बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत सभी नेता मौजूद थे। केवल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं पहुंच सके जबकि बीजेपी कोर ग्रुप सदस्यों की सूची में 11 वें नंबर पर नाम वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा का न होना तुरंत चर्चा में आ गया। उनसे जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमें इस मीटिंग को लेकर कोई सूचना नहीं मिली थी। जबकि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि बैठक में आमंत्रित सभी सदस्य शामिल हुए। मतलब पार्टी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को नजरअंदाज किया। यह कुछ ओर संकेत दे रहे हैं। उनकी फोटो पर एक प्रतिक्रिया यह है कि एक समय यह शख्स मप्र बीजेपी सरकार का सबसे बड़ा संकट मोचक और कांग्रेस के 4 लाख कार्यकर्ताओं को बीजेपी ज्वाइन करवाने का दावा करने वाले नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के साथ ऐसा व्यवहार क्यों और कब तक?
दूसरी तस्वीर अमित शाह के दौरे की है जब केवल नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को गृहमंत्री अमित शाह के स्वागत की अनुमति मिली, बाकी नेता लौटा दिए गए। कैलाश विजयवर्गीय अमित शाह को विदा करने स्टेट हेंगर भी पहुंचे थे। अमित शाह की यात्रा के ठीक पहले भोपाल आए बीजेपी प्रभारी बिप्लव कुमार देब ने भी समूह फोटो के दौरान एक तरफ खड़े कैलाश विजयवर्गीय को बुला कर अपने पास खड़ा किया था। इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी इंदौर दौरे के दौरान कैलाश विजयवर्गीय को बहुत आदर दिया था। यह दृश्य कैलाश विजयवर्गीय का कद का अहसास करवाते माने गए।
तीसरी फोटो सीएम मोहन यादव के खंडवा दौरे की है। इस दौरान मंत्री विजय शाह उन्हें धूप से बचाने के लिए गाड़ी में छतरी ताने खड़े नजर आ रहे हैं। मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी और उससे जुड़े कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में रहे हैं। बीते दिनों सरकार ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने से इंकार कर दिया है। ऐसे में इस तस्वीर के भी अपने अर्थ निकाले जा रहे हैं।
उमा भारती को खुश कर गए अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भोपाल आगमन के बाद उनकी यात्रा के परिणाम को टटोला जा रहा है। सभी यह पता करने में जुटे हैं कि आखिर सारे तय कार्यक्रम रद्द कर अमित शाह ने छह घंटे एक बंद कमरे में क्या किया। कयासों के बीच यह भी देखा जा रहा है कि अमित शाह की इस यात्रा से किस का कद बढ़ा और किस नेता को क्या संदेश मिला। ताजा आकलप यह है कि गृहमंत्री अमित शाह की भोपाल स यात्रा से कोई खुश हुआ हो या नहीं हुआ हो, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती जरूर खुश हैं।
असल में उमा भारती की खुशी का राज गृहमंत्री अमित शाह की नशा मुक्त मध्यप्रदेश की घोषणा है। बीते कुछ सालों से शराबबंदी की मांग कर रही उमा भारती का कहना है कि नशा मुक्ति कीशुरुआत शराबबंदी से होगी। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि लंबे समय से इस घोषणा का इंतजार था। अमित शाह की घोषणा ने हमारे मन की मुराद पूरी कर दी। मध्य प्रदेश को नशामुक्ति का केंद्र बनाने से पूरे देश पर असर पड़ेगा। इस कदम का राजनीतिक फायदा होगा या नहीं लेकिन शराबबंदी को लेकर उमा भारती की सक्रियता बढ़ने के आसार जरूर हैं।
खत्म नहीं हो रही रीवा बीजेपी की चकल्लस
शायद ही कोई सप्ताह होता होगा जब रीवा बीजेपी में गुटबंदी और वर्चस्व की लड़ाई खबर नहीं बनती होगी। इस बार प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का दौरा चर्चा में रहा। एक वीडियो वायरल हुआ जिसके बारे में कहा गया कि हेमंत खंडेलवाल के स्वागत के लिए समर्थकों के साथ सड़क पर खड़े नेता विधायक नरेंद्र प्रजापति हैं। वे इंतजार कर रहे थे कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलाल को अन्य नेता अपने कैम्प में ले कर चले गए। बाद में विधायक नरेंद्र प्रजापति भी समर्थकों के साथ प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के स्वागत में पहुंचे।
एक अन्य वीडियो रोड शो का है। इसमें दिखाई दे रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ गाड़ी में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, कांग्रेस से बीजेपी में आए विधायक सिद्धार्थ चतुर्वेदी आदि नेता खड़े हैं। तभी सांसद जनार्दन मिश्रा गाड़ी में सवार होते हैं और विधायक सिद्धार्थ चतुर्वेदी को पीछे कर आगे खड़े हो जाते हैं। इस वीडियो पर कमेंट किया गया कि सांसद जनार्दन मिश्रा ने विधायक सिद्धार्थ चतुर्वेदी को बता दिया कि यह कांग्रेस का नहीं, बीजेपी का रोड शो है जहां सब की जगह तय है। इन दोनों मामलों को पार्टी में वर्चस्व के संघर्ष से जोड़ कर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी के पत्र से शिक्षकों के इरादे बुलंद
छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने जो कहा अब वे उसको पूरा कर रहे हैं। पद बढ़ाने के लिए भोपाल में आंदोलन कर रहे शिक्षकों के समर्थन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लिखा है कि भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों से बातचीत करनी चाहिए लेकिन उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहले से ही एक लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं। शिक्षक भर्ती-2025 में वर्ग-3 के केवल 13,089 और वर्ग-2 के केवल 10,800 पदों पर भर्ती निकाली गई है। अभ्यर्थियों की मांग है कि शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा भी मिलेगी और हजारों युवाओं को पक्की नौकरी भी। कई अभ्यर्थी परीक्षा में अच्छे अंक लाए हैं और कई अतिथि शिक्षक के रूप में पढ़ा भी रहे हैं लेकिन सीमित पदों के कारण वे पक्की नौकरी से वंचित हैं। इंतजार करते-करते कई आयु सीमा के करीब पहुंच चुके हैं।
राहुल गांधी ने अभ्यर्थियों को भेजे गए नोटिस तुरंत वापस लेने की भी मांग की है। गौरतलब है कि इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों ने उनके सामने यह मुद्दा उठाया था। भोपाल में आंदोलन कर रहे शिक्षकों के लिए राहुल गांधी का पत्र उत्साहवर्धक हैं। इस पत्र के बाद शिक्षकों को ताकत मिल गई है।