इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर ने युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की असाधारण सफलता को अध्ययन का विषय बनाने का फैसला किया है। संस्थान वैभव के प्रदर्शन, व्यक्तित्व और विकास यात्रा पर आधारित देश की पहली मल्टी डिसिप्लिनरी केस स्टडी तैयार करेगा। इस अध्ययन में खेल, मनोविज्ञान और प्रबंधन क्षेत्र के विशेषज्ञ मिलकर यह समझने की कोशिश करेंगे कि कम उम्र में असाधारण सफलता हासिल करने वाले खिलाड़ियों के पीछे कौन-कौन से कारक काम करते हैं।

महज 15 साल की उम्र में क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। राजस्थान रॉयल्स के ओपनर के तौर पर खेलते हुए उन्होंने एक ही सीजन में 72 छक्के लगाकर क्रिस गेल का 14 साल पुराना 59 छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनके विस्फोटक खेल और लगातार शानदार प्रदर्शन ने विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

IIM इंदौर के निदेशक हिमांशु रॉय के अनुसार, यह अध्ययन केवल वैभव की उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि उन सामाजिक, पारिवारिक, मनोवैज्ञानिक और संस्थागत परिस्थितियों का भी विश्लेषण करेगा जिन्होंने उनकी प्रतिभा को निखारने में भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि किसी खिलाड़ी की सफलता केवल प्राकृतिक प्रतिभा का परिणाम नहीं होती बल्कि उसके पीछे परिवार का त्याग, निरंतर मेहनत, सही मार्गदर्शन और मजबूत समर्थन प्रणाली भी महत्वपूर्ण होती है।

रॉय ने बताया कि संस्थान वैभव की क्रिकेट यात्रा को एक ऐसे मॉडल के रूप में देख रहा है जिससे यह समझा जा सके कि प्रतिभा को लंबे समय तक उत्कृष्ट प्रदर्शन में कैसे बदला जा सकता है। उनके मुताबिक, केवल क्षमता होना पर्याप्त नहीं है बल्कि सही सोच, अनुशासन, नेतृत्व और संतुलित वातावरण भी उतने ही जरूरी हैं।

IIM इंदौर की मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ. आरती चोपड़ा ने कहा कि यह अध्ययन भविष्य के प्रबंधकों और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि 5 फीट 7 इंच लंबाई और लगभग 55 किलोग्राम वजन वाले वैभव अपनी तेज बैट स्पीड और बेहतरीन टाइमिंग के दम पर बड़े-बड़े गेंदबाजों को चुनौती देते हैं।

वैभव की तकनीकी क्षमता भी विशेषज्ञों के लिए अध्ययन का विषय बनी हुई है। बचपन में कोच मनीष ओझा ने उनकी प्रतिभा को तराशा था। जबकि, वर्तमान में राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेट निदेशक जुबिन भरूचा उनकी बल्लेबाजी पर काम कर रहे हैं। कोच विक्रम राठौर भी उनके संतुलन और बल्लेबाजी शैली की सराहना कर चुके हैं। बताया जाता है कि वैभव का निर्णय लेने का समय लगभग 0.3 सेकंड है। जिसके कारण गेंदबाजों को रणनीति बनाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।

उनके आत्मविश्वास का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब राहुल द्रविड़ ने उन्हें अधिक सावधानी से बल्लेबाजी करने की सलाह दी तो वैभव ने जवाब दिया कि गेंदबाजों को उनके खेल के अनुसार खुद को ढालना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि आउट होने का डर न होने के कारण दबाव की परिस्थितियों में भी उनकी बल्लेबाजी तकनीक और मानसिक संतुलन प्रभावित नहीं होता।

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सफलता के नकारात्मक पहलुओं पर भी केंद्रित रहेगा। हिमांशु रॉय ने कहा कि कम उम्र में मिलने वाली लोकप्रियता, भारी आर्थिक अवसर और सोशल मीडिया का दबाव कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए चुनौती बन सकता है। कई बार अत्यधिक अपेक्षाएं और मानसिक थकान खिलाड़ियों की प्रगति को प्रभावित कर देती हैं। ऐसे में यह शोध उन परिस्थितियों की पहचान करने का प्रयास करेगा जो युवा प्रतिभाओं को लंबे समय तक सफल बनाए रखने में मदद कर सकें।

रॉय के मुताबिक, इस अध्ययन से ऐसा ब्लूप्रिंट विकसित करने की कोशिश की जाएगी जो केवल खेल जगत ही नहीं बल्कि कॉरपोरेट क्षेत्र में भी प्रतिभा प्रबंधन के लिए उपयोगी साबित हो सके। उनका मानना है कि वैभव जैसे खिलाड़ियों की यात्रा से यह समझा जा सकता है कि असाधारण प्रतिभा को कैसे संरक्षित और विकसित किया जाए ताकि वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सके।

आईपीएल 2026 में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। उन्होंने 16 पारियों में 48.50 की औसत और 237.30 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए थे। इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और पांच अर्धशतक निकले थे। वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे और ऑरेंज कैप जीतने में सफल रहे। इसके अलावा उन्हें सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन और इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन जैसे सम्मान भी मिले। कुल मिलाकर वैभव ने आईपीएल 2026 में ऑरेंज कैप सहित पांच बड़े अवॉर्ड अपने नाम कर क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली है।