युगांडा के किबाले नेशनल पार्क में स्थित न्गोगो चिंपांजी समुदाय हिंसक संघर्ष का केंद्र बन गया है। यह कभी अपनी एकजुटता के लिए जाना जाता था। करीब 200 सदस्यों वाले इस समूह में 2018 के आसपास दरार पड़ी।जिसके बाद यह वेस्टर्न और सेंट्रल दो गुटों में बंट गया था। तब से जारी इस टकराव में अब तक 28 चिंपांजियों की जान जा चुकी है। जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। हमले सुनियोजित तरीके से किए जा रहे हैं और एक गुट दूसरे की जमीन पर कब्जा करता जा रहा है।
न्गोगो समुदाय को दुनिया का सबसे बड़ा और स्थिर चिंपांजी समूह माना जाता था। यहां सदस्य साथ रहते, खाते और एक-दूसरे की देखभाल करते थे। लेकिन बीते कुछ सालों में रिश्तों में आई दरार ने इसे हिंसक संघर्ष में बदल दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, वेस्टर्न गुट के चिंपांजी बेहद संगठित तरीके से हमले कर रहे हैं। वे चुपचाप कतार में चलते हुए विरोधी इलाके में घुसते हैं, घात लगाते हैं और मौका मिलते ही हमला कर देते हैं। यह व्यवहार किसी प्रशिक्षित सैन्य अभियान जैसा प्रतीत होता है।
इस संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान सेंट्रल गुट को हुआ है। यह पहले संख्या में बड़ा था लेकिन अब लगातार कमजोर होता जा रहा है। हमलों के दौरान न केवल वयस्क चिंपांजियों को निशाना बनाया जा रहा है बल्कि बच्चों को भी नहीं छोड़ा गया है। जिससे इस संघर्ष की क्रूरता और बढ़ गई है। साथ ही, वेस्टर्न गुट धीरे-धीरे विरोधी क्षेत्र पर कब्जा भी करता जा रहा है जो इस लड़ाई को सिर्फ जीवित रहने की जंग नहीं बल्कि वर्चस्व की लड़ाई बनाता है।
वैज्ञानिक इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हैरान हैं। आमतौर पर चिंपांजी बाहरी समूहों के खिलाफ आक्रामक होते हैं लेकिन अपने ही पुराने साथियों के खिलाफ इस तरह का संगठित और लंबा संघर्ष बेहद दुर्लभ माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विभाजन के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।